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Sunday, 2 April 2017

Alone boy 12

हां,
मैं देख रहा हूं,
आसमान में,
वहीं नौ तारे,
हर दिन
ये ऐसे ही
आसमान में
इसी जगह
चमकते हैं।
जानती हो ना,
बाकी सात
तारों की बजाय
दो तारे
कुछ अलग ही
मूड में
नजर आते हैं,
हर पल
कुछ तलाश करते हुए
नजर आते हैं,
जानें क्या खो
गया है इनका,
एक से जाकर
पूछता हूं,
अरे
इसका तो
चैन
नींद
स्वप्न
आत्मविश्वास
सब कुछ खो
गया है,
दुसरे से
पूछता हुँ तो
जवाब आया
क्योंकि ​उसका
सबकुछ
मेरी वजह से
खोया है तो
मैं उदास हुँ,
मैं बोला तो
वापस
लौटा​क्यों नहीं देती
उसका सबकुछ,
वो तारा
उदास स्वर में
बस यही
बोल पाया,
मेरे हाथ में नहीं है
लौटाना
मैं तो
बस
उसके साथ
उदास हो
सकता हूं........
©® जाँगिड़ करन kk
02/04/2017___21:00PM

A letter to swar by music 54

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