और
आज भी
वो तन्हा तारा
अपनी जगह
उसी ओर निगाहें जमायें
खड़ा है।
हां,
उस चमकीले तारे
की तरफ
कुछ उम्मीद है,
कुछ अहसास है,
कुछ जज्बात है,
और फिर
उसे फिक्र भी
कि
चमकीले तारे की
चमक
सही तो है,
या मन में
वो भी पीड़ा
लिए ही
तो नहीं चल
रहा कहीं.....
मगर चमकीले तारे की
अकड़ तो
देखो,
जानें क्या ठान के
बैठा है,
जानें कहीं ओर
क्या ढुंढता फिर रहा,
कभी मन की
क्यों
सुनता नहीं.....
©® जाँगीड़ करन kk
10/04/2017___21:30PM