Showing posts with label मेरा चाँद. Show all posts
Showing posts with label मेरा चाँद. Show all posts

Sunday, 9 August 2015

सुनो तो जरा

अपने चेहरे से दुपट्टा हटाओ तो जरा,
हमें चाँद का गुरूर तोड़ने दो जरा|

अपनी चाल मस्तानी दिखाओ तो,
बल खाती नदी से कुछ बोलने दो जरा|

इन झील सी आँखों को खोलो तो,
मुझे इनकी गहराई में डुबने दो जरा|

अपनी खुली जुल्फों को भी छितराओ तो,
इन बादलों को भी भ्रम में डालने दो जरा|

यह अपनी पायल की छमछम सुना दो मुझे,
दिल में बसे गीत को बाहर निकालने दो जरा|

ओ चिड़िया अब थोड़ा सा गुनगुना भी दो,
'करन' को तो बस स्वर तेरा ही सुनने दो जरा|

©®jangir karan dc

A letter to swar by music 54

  Dear swar, मुझे अब भी खटकता है, तेरा नदी के उस पार होना। सांसें बेशक हैं मगर, जिंदगी का यह कैसा अफसाना।। पता नहीं क्यों, लेकिन इन दिनों...