Sunday, 9 August 2015

सुनो तो जरा

अपने चेहरे से दुपट्टा हटाओ तो जरा,
हमें चाँद का गुरूर तोड़ने दो जरा|

अपनी चाल मस्तानी दिखाओ तो,
बल खाती नदी से कुछ बोलने दो जरा|

इन झील सी आँखों को खोलो तो,
मुझे इनकी गहराई में डुबने दो जरा|

अपनी खुली जुल्फों को भी छितराओ तो,
इन बादलों को भी भ्रम में डालने दो जरा|

यह अपनी पायल की छमछम सुना दो मुझे,
दिल में बसे गीत को बाहर निकालने दो जरा|

ओ चिड़िया अब थोड़ा सा गुनगुना भी दो,
'करन' को तो बस स्वर तेरा ही सुनने दो जरा|

©®jangir karan dc

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