मैं तो अकेला ही
अपनी मंजिल की और था
तुमने ही तो
कहाँ था
हमारी भी मंजिल वहीं है
और फिर
तुम हो लिये साथ मेरे
पकड़ के हाथ मेरा
कहाँ था तुमने
साथ रहेंगे
साथ चलेंगे
बनेंगे एक दुसरे का सहारा
हाँ याद है ना तुमको
मैनें भी दिया था हाथ अपना
ये राहें युहीं कटती रहीं
तेरे साथ
तेरे साथ ने
कितना बदल दिया
है मुझको
बन गई हो तुम
ताकत मेरी
तुम्हारे साथ
ये राहें भी
हो गई है कितनी आसान
वक्त का कुछ
पता ही नही चलता
बस चाहत इतनी सी है
गुजरता जायें
यह वक्त युहीं तेरे साथ
हाँ तेरा साथ
कितना प्यारा है
कितनी प्यारी है तेरी मुस्कान
ओ हमराही
©® karan dc
और मैं, मेरी चिंता न कर मैं तो कर्ण हुँ हारकर भी अमर होना जानता हुँ
Friday, 21 August 2015
ओ हमराही
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