जब भी होता हूँ सफ़र में,
दिल में कोई सफर चलता है।
सफ़र उस राह तक का
सफ़र उस रात तक का
जिस रोज तुमने पहनी थी चूड़ी
सफ़र खनकती बाँह तक का,
कोई ख्वाब जबकि अब भी पलता है।
जब भी ........................
सफ़र उस छाँव का
मिट्टी से महकते गाँव का
न तुमको खबर थी न मालुम हमको
कदम पीछे हटा किस पाँव का,
क्यूँ ये वक़्त भी बेवक़्त छलता है।
जब भी ..........................
दिल में कोई सफर चलता है।
सफ़र उस राह तक का
सफ़र उस रात तक का
जिस रोज तुमने पहनी थी चूड़ी
सफ़र खनकती बाँह तक का,
कोई ख्वाब जबकि अब भी पलता है।
जब भी ........................
सफ़र उस छाँव का
मिट्टी से महकते गाँव का
न तुमको खबर थी न मालुम हमको
कदम पीछे हटा किस पाँव का,
क्यूँ ये वक़्त भी बेवक़्त छलता है।
जब भी ..........................
हमने शहर कहाँ देखा है
तेरे मेरे बीच यहीं तो रेखा है
तुम्हारा इरादा तो अच्छा ही होगा
किस्मत का भी यही लेखा है,
दिल है कि अब भी जलता है।
जब भी ............................
तुम रहो जिन्दगी के सफ़र में
मोड़ पर बैठ गया मगर मैं
बालों में सफेदी आने तो दो
तुम भी रहोगी तन्हा शहर में,
देखना करन सूरज कहाँ ढलता है।
जब भी................................
तेरे मेरे बीच यहीं तो रेखा है
तुम्हारा इरादा तो अच्छा ही होगा
किस्मत का भी यही लेखा है,
दिल है कि अब भी जलता है।
जब भी ............................
तुम रहो जिन्दगी के सफ़र में
मोड़ पर बैठ गया मगर मैं
बालों में सफेदी आने तो दो
तुम भी रहोगी तन्हा शहर में,
देखना करन सूरज कहाँ ढलता है।
जब भी................................
@ जांगिड़ करन(बलराम)
22.02.2020....... 20:30 PM