Tuesday, 20 October 2015

ख्वाब तो ख्वाब है

उनकी घनी जुल्फों में हम खो जाने वाले है|
कहती है गालों की लाली वो शरमाने वाले है||

लगा के मेहंदी हाथों में अपने बैठे हुए है कब से,
कुछ इस कदर मोहब्बत वो हमसे जताने वाले है|

दिल लें चल आज फिर उनकी गलियों में,
सुना है वो बालों में गजरा लगाने वाले है|

छत पर देखा उनको सारे शहर ने जब से,
हुए बावले सब आज ईद मनाने वाले है|

देख के उनकी ये नाजुक सी अदायें,
हम भी अब थोड़ा 'स्वर' गुनगुनाने वाले है|

कितना सुंदर कितना प्यारा ख्वाब है 'करन',
जज्बात मेरे अब यहीं ख्वाब सजाने वाले है|

©® करन

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