Friday, 1 December 2017

आई जो तुम

अल सुबह
मेरे घर के
आँगन में
यह चहकना कैसा?

कि तुमने
भूल से
मेरे घर का
रुख किया
या
तुम्हारे सपनों में
मैं भी आया था कहीं?

कि तुमने
जिद की
कोई
इंतिहा की
या
दिल में
पनपा है कोई
प्यार फिर से?

कि
वक्त की कसौटी
पर पसारे है पंख
या
कच्ची उड़ान से
मेरा मन
बहलाने का
इरादा तुम्हारा?

पल भर में
सपने अनगिनत मेरी आंखों में
आये
मैंने खुद उन्हें बुना था
या
तेरी चहचहाहट यहां
इन्हें खींचकर ले आई?

©® जांगिड़ करन kk
1-12-2017____10:00AM

फोटो सुबह आंगन में आ बैठी चिड़िया को पहले रोटी का टुकड़ा डालकर खुद ने खींचा, क्योंकि शब्द निर्माण हो रहे थे उसी वक्त.... 😍😍😍😍😍😍

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