Tuesday, 10 January 2017

बढ़ते जाओ

मेरी प्रीत
तुम्हारी
राह न रोकेगी,
अपने
लक्ष्य की ओर
तुम बढ़ते जाओ.......
.............................
बीच राह में
कोई
दरिया भी आयेगा,
मेरी हथेलियों का
पुल
चढ़ते जाओ........
.........................
गर्म रेत
झुलसायेगी
तुम्हारे पाँव,
मेरे आँसुओं से
तलवे
भिगोते जाओ......
.........................
आँधी या
तुफाँ से
घबरा न जाना,
बुलाना
करन को कि
अब तो आ जाओ......
.........................
© ® जाँगीड़ करन kk
10/01/2017__7:00AM

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