जान हथेली पर लेकर चलें,
ऐसे वतन के रखवाले।
हर तकलीफ को यें झेलें,
ऐसे वतन के रखवाले।।
।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।
सीना तान के चलते जायें,
एक कदम न पीछे हटायें,
कभी न अपनी पीठ दिखायें,
ऐसे वतन के रखवाले।।
।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।
बर्फ की ऊँची दीवारों में,
साहस समंदर किनारों में,
कभी रेत के धोरों में,
ऐसे वतन के रखवाले।।
।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।
ठिठुरती है जमाने वाली,
रेत भी होती है जलाने वाली,
करते हैं फिर भी रातें काली,
ऐसे वतन के रखवाले।।
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सीना छलनी छलनी होता,
फिर भी साहस कम नहीं होता,
नाम वतन का जुबां पर होता,
ऐसे वतन के रखवाले।।
©® जाँगीड़ करन kk
25/01/2017__7:30AM
और मैं, मेरी चिंता न कर मैं तो कर्ण हुँ हारकर भी अमर होना जानता हुँ
Wednesday, 25 January 2017
ऐसे वतन के रखवाले
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