जिंदगी.....
बिलखते बच्चे को
सीने से लिपटाकर
चुप कराती
मां
के फटे आंचल की
दास्तां............
.............
जिंदगी.....
बच्चे को
कंधे पर
बिठाकर कर
घुमाते
पिता के
पैरों की थकान....
.............
जिंदगी......
फिसलते
भाई की खातिर
जोखिम उठाते
इक अपंग
की जान......
..........
जिंदगी......
दरकते
रिश्तों को
घावों से
रोकने का
सिसकता सा
मान.........
......
जिंदगी....
बगैर तेरे
भटकता राही
जैसे
मरूथल के
दरमियान.....
.......
जिंदगी......
जो समझा नहीं
कोई
करन के
कुछ लफ़्ज़ों
में
बहकता सा
इमान.....
.......
©® जांगिड़ करन kk
28_01_2018____18:00PM
और मैं, मेरी चिंता न कर मैं तो कर्ण हुँ हारकर भी अमर होना जानता हुँ
Sunday, 28 January 2018
जिंदगी तुम से है
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A letter to swar by music 54
Dear swar, मुझे अब भी खटकता है, तेरा नदी के उस पार होना। सांसें बेशक हैं मगर, जिंदगी का यह कैसा अफसाना।। पता नहीं क्यों, लेकिन इन दिनों...
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Dear swar, सबसे पहले तो थैंक्यू बनता ही है, देर से ही सही तुमने मेरे पत्र का जवाब तो दिया, हां मुझे याद है तुम्हें 50वा पत्र मैंने 19 अगस्त ...
निः शब्द....🙏
ReplyDeleteवाह
ReplyDeleteबहुत खूब
हर पंक्ति में जिंदगी का सार