और मैं, मेरी चिंता न कर मैं तो कर्ण हुँ हारकर भी अमर होना जानता हुँ
चलो खुद को खुद में बसाया जायें, जिंदगी से कुछ इस तरह भी मिला जायें! बिन स्वर अधुरा है हर गीत मेरा, बेसुर ही सही 'करन' पर कुछ तो गुनगुनाया जायें!! ©® karan (08-07-2015)
Dear swar, कई रोज़ हुए मुझे तुम्हारा कोई ख़त नहीं मिला। पहले तो मैं हर सुबह दरवाज़े की आहट पर चौंक जाता था, जैसे डाकिए के हाथों में तुम्हारे...
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