चलो खुद को खुद में बसाया जायें,
जिंदगी से कुछ इस तरह भी मिला जायें!
बिन स्वर अधुरा है हर गीत मेरा,
बेसुर ही सही 'करन' पर कुछ तो गुनगुनाया जायें!!
©® karan (08-07-2015)
और मैं, मेरी चिंता न कर मैं तो कर्ण हुँ हारकर भी अमर होना जानता हुँ
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A letter to swar by music 53
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