Saturday, 25 July 2015

आज भी है

क्यों तेरी खुशबु फ़िजाओं में आज भी है,
क्यों तेरी पायल की छमछम कानों में आज भी है|
तु तो एक बीता हुआ कल है,
क्यों ख्वाबों में तेरी ही तस्वीर आज भी है||

क्यों तेरी जुल्फों की घटा मेरे दिल में आज भी है,
क्यों तेरी वो सादगी मुझे लगती अच्छी आज भी है|
तु तो मजबूर है ना अपने ऊसुलों पे चलने को,
फिर क्यों मुझे तेरा इंतजार आज भी है||

हाँ तेरे ही नाम से धड़कता मेरा दिल आज भी है,
हाँ तेरे ही ख्वाब बुनने का शौक मुझे आज भी है|
हाँ मैनें ही की है मोहब्बत तुमसे 'करन',
ओ चिड़िया तेरी चहचाहट सपनों में आज भी है||
©® jangir karan DC (25-07-2015)

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