Sunday, 27 September 2015

गिले शिकवे

मिलकर के तुमसे ही मेरे अरमान मचलते है,
देख के जुल्फें तेरी जज्बात ये बहकते है|

मिलने न दिया कभी जहाँ ने हमको,
देख के संग हमको सब यहाँ जलते है|

न जाने कैसा जादु है तेरी आँखों में,
देखकर इनके दिल में तुफान से चलते है|

थामा है तुमने हाथ अपने हाथ मेरा,
वरना युहीं कहाँ ये दिल मिलते है|

तन्हाई की रात आहों में कटती है करन,
बस गिले शिकवे ही अब तो दिल में रहते है|

©® करन जांगीड़

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