Saturday, 2 January 2016

A letter to swar by music 3

Dear swar,

आज साल 2016 का पहला दिन है। यह पत्र आज शाम को मैं तुम्हें लिखने जा रहा हुँ। वैेसे मैनें किसी को नववर्ष की शुभकामनाएँ नहीं दी है और न हीं किसी से स्वीकार की है। पर तुम्हें तो जरूर देनी पड़ेगी।
So Happy new year dear......
और क्या चल रहा है। अरे हाँ। पता चला है कि तुम बहुत व्यस्त हो आजकल। जानता हुँ मैं। पर यह व्यस्तता भी नियती का नियम है। मैं तो सबकुछ सहन कर चुका हुँ। तुम पर तो इस तरह की विपत्ति तो नहीं आई ना।
खैर छोड़ो व्यस्तता खत्म होने पर ही सही जवाब दे देना खत का।
और हाँ सुना है कि इसी व्यस्तता के दौरान तुम्हें लंबी यात्रा पर जाना पड़ा। जो घर से बाहर भी न निकलें वो लंबी यात्रा पर?? थेंक गॉड!! सही सलामत वापस आ गये। व्यस्तता खत्म होने पर मुझे भी बताना अपना यात्रा वृतांत!!

हाँ।।

आज काफी दिनों के बाद मैं अपने खेतों की तरफ गया था। हाँ। वो भी पैदल पैदल। पर फर्क था कि आज मैं अकेला था। इन तन्हा राहों में अकेला जा रहा था । तुम्हारे ही ख्याल में खोया खोया। रास्ते में अचानक कहीं से एक पतंग आई और झाड़ में उलझ गई। और पीछे एक बच्चा दौड़कर आया, कहने लगा कि भैया मेरी पतंग छुड़ा दो ना! पता है मैनें पतंग उतार दी लेकिन उस दौरान मेरी उंगली में काँटा चुभ गया था और खून की दो बूँद गिर गई।
और याद गया मुझे वो पल!! जब इसी रास्ते पर हम दोनों पैदल पैदल खेत पर जा रहे थे। तुम्हारी चुनरी अचानक झाड़ में ऊलझ गई और जब मैनें छुड़ाई तब मेरी ऊँगली में चोट लग गई! याद है ना! तुमने अाव देखा न ताव फटाफट अपनी चुनरी का पल्लु फाड़कर मेरी अँगुली पर बाँध दिया था।
आज जब फिर वहीं पे काँटा चुभ गया तो वो पल याद आ गया और दर्द अपने आप खत्म हो गया। तुम्हारी याद भी कमाल है ना!!

खैर आगे सुनो!!
मैं खेत पर पहुँचा! यहाँ सब बदला बदला सा है। यहाँ जोहड़ पर अब पंपसेट लगा हुआ है हाँ लोग अभी भी पहले की तरह काम कर रहे है।
तुम्हें पता है ना! जब हम यहाँ साथ साथ आते थे तब यहाँ रहट था। जब रहट में बैल चलता तो उसके घुँघरू की कितनी मधुर आवाद आती थी। हम जोहड़ के पास इस आवाज को सुनते थे। इक दुसरे में इतना इतना खो जाते थे कि पता ही नहीं चलता कि कब समय बीत गया।
लेकिन यहाँ पर भी मैं आज अकेला बैठा हुँ। न रहट है, ना ही वो बैल,
और तुम भी यहाँ नहीं हो!!
सोचकर उदास हो गया था यार! बहुत ज्यादा उदास।।।
पर क्या करें?
तुम भी क्या करो?
तुम्हारी अपनी मजबुरियाँ है!!
।।।।।।।
।।।।।।
।।।।
।।।
।।
।
कहीं पे मजबुरियाँ तुम्हारे पाँव बाँधे है, तो कहीं पर मैं खुद ठहरा हुँ।
वक्त न जाने जाने क्या कहता है करन से, मैं तो आज भी तुम्हारी यादों में बहरा हुँ।

और भी बहुत सी बातें याद आई पर सारा का सारा खत में नहीं लिख पाऊँगा।
बाकी फिर कभी।।
टेक केयर।।।।।।

सिर्फ तुम्हारा
संगीत

©® करन जाँगीड़
01/01/2016_20:10 pm

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