जिंदगी
खिलखिलाती धूप का
मासूम परिंदा...
....
जिंदगी
अलसाई सी बगियाँ का
फूल उनिंदा...
......
जिंदगी
हर हार से बेखबर
होकर है जिंदा....
.......
जिंदगी
मासूम बच्चे का बनाया
रेत का घरौंदा....
........
जिंदगी
हर श्वास से पल
जैसे हो चुनिंदा...
.......
जिंदगी
कहीं और ने मिली
बस रहा एक स्वर शौकिंदा...
.......
जिंदगी
कुछ नहीं है बस
दफ़न ख्वाबों की कब्र जिंदा।
©® जाँगीड़ करन kk
02/07/2016__08:20AM
और मैं, मेरी चिंता न कर मैं तो कर्ण हुँ हारकर भी अमर होना जानता हुँ
Tuesday, 2 August 2016
जिंदगी क्या है?
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