Thursday, 3 November 2016

जुल्फों के फंदे

जुल्फों के इन फंदों में फँसकर,
जिंदगी नहीं चलती संभलकर।

आईना भी तुमसे कहता होगा,
जान लेगी मुँह उस तरफ कर।

साँझ ढले पनघट पर न जाना,
राही गिरते पड़ते संभलकर।

आसमान तो है काला काला,
पुर्णिमा कर दें चल छत पर।

एक करन अब कितना बोलें,
चल सोजा ख्वाब संजोकर।।
©® जाँगीड़ करन kk

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