#Alone_boy_5
कंगन
बिंदिया
काजल
कंघा
कोई शायद
किसी और के
लिये
सज सँवर
रहा है अब.......
जानता था
वो भी
एक दिन
जाना ही है
उसको
रह जायेगा
अकेला ही
वो तब..........
वो खुद भी
लेकर
बैठा है
ये साज
श्रृंगार के
सामान मगर
मगर क्या मालुम था
उसे
यहीं उसको
सतायेंगे
अकेले में जब......
वो तन्हा
अकेले में
बस देख कर
इनको
रोज
अश्रु बहाता है
और सोचता है कि
क्या वो आयेगी फिर
या ये युहीं
उसे
चिड़ाते रहेंगे
अब...........
©® जाँगीड़ करन kk
20/02/2017___6:00AM
और मैं, मेरी चिंता न कर मैं तो कर्ण हुँ हारकर भी अमर होना जानता हुँ
Monday, 20 February 2017
Alone boy 5
Subscribe to:
Post Comments (Atom)
प्रकृति और ईश्वर
प्रकृति की गोद में ईश्वर कहें या ईश्वर की गोद में प्रकृति ...... जी हां, आज मैं आपको एक ऐसे प्राकृतिक स्थल के बारे में बताऊंगा जहां जाकर आ...
-
मुझे युँ आजमाने की कोशिश न कर। अंधेरा बताने की कोशिश न कर।। झर्रे झर्रे से दर्द ही रिसता है यहाँ, मेरे दिल को छलने की कोशिश न क...
-
यादों के उस समंदर से भरके नाव लाया हुँ, जवानी के शहर में बचपन का गाँव लाया हुँ। झाड़ियों में छिपे खरगोश की आहट, कच्चे आमों की वो खट्टी...
-
हर दोपहर जिंदगी जाने कितने ख्वाब बदलती है। ज्यूं सुबह से घटती है परछाई, ख्वाबों की भी किस्मत घटती सी लगती है, दिल में कुछ बैचे...
No comments:
Post a Comment