तु ही माँ वीणापाणी,
तु ही माँ शारदे।।
तेरी शरण में हूं मैया,
जीवन का मुझे सार दें।
तेरा वैभव गा सकुँ मैं,
कंठ में ऐसी झंकार दें।
सारे जग में नाम कमाऊं,
ऐसा मुझे आधार दें।
कोई दुखी रहे नहीं यहां,
खुशियों का संसार दें।
स्वर साधना लें निकला हुँ,
गीत का आकार दें।
#karan
01_02_2017____6:00AM
और मैं, मेरी चिंता न कर मैं तो कर्ण हुँ हारकर भी अमर होना जानता हुँ
Wednesday, 1 February 2017
सरस्वती वंदना
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A letter to swar by music 53
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