देखो
तो जरा
आसमान को
तारे तो
अपनी अपनी
जगह पर है,
मगर यह
चांद
जानें कहां
छुपा बैठा है,
न इसकी
फितरत
मालुम
न ही इसके
मन की व्यथा,
शायद खुद में
किसी
उलझन को....
अरे! ऊधर देखो
पूर्व में
चांद आया
थोड़ा
शरमा रहा,
शायद
इसलिए
लालिमा लिए है,
या
रूठा हुआ हो
शायद,
मगर देखो
तारें
को विश्वास है
कि
चाँद
आयेगा जरूर
अपनी छटा से
रात को
चमकायेगा जरूर...
©® KK
14_04_2017__22:50pm
और मैं, मेरी चिंता न कर मैं तो कर्ण हुँ हारकर भी अमर होना जानता हुँ
Saturday, 15 April 2017
Alone boy 15
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A letter to swar by music 54
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