Friday, 28 April 2017

Alone boy 21

आज कुछ रंगत
चेहरे की
उड़ी हुई लगती है,
साँस में
भी कुछ
बदहवासी सी लगती है,
कल कोई
ख्वाब बुना था,
आज आँख
सूनी सूनी
सी लगती है,
परेशान
इश्क की
परेशान दास्तां है,
हवाएं भी उसे
सहमी सी लगती है,
कोई रो रहा या
खामोश है युहीं,
हर बात उसे
कुछ बदली बदली
सी लगती है,
किसी की पुकार
पर वो
ऊठ बैठा है,
हर आहट
उसे आगमन सी लगती है,
मालुम उसे
वक्त के हर
दांव है मगर,
जिंदगी फिर
उसको अलमस्त सी लगती है।
©® जाँगीड़ करन kk
28_04_2017__20:00PM

No comments:

Post a Comment

A letter to swar by music 54

  Dear swar, मुझे अब भी खटकता है, तेरा नदी के उस पार होना। सांसें बेशक हैं मगर, जिंदगी का यह कैसा अफसाना।। पता नहीं क्यों, लेकिन इन दिनों...