कल रात
वो
छत पर बैठकर
आसमां में
कुछ घूरता रहा,
और अचानक नजर
ठिठक गई,
हां,
तीन तारे
एक साथ नजर
आयें थे उसे,
एक लाइन में,
बिल्कुल करीब करीब,
दोनों तरफ के
तारों के साथ
कोई थे,
पर बीच
का तारा
अकेला ही था,
कुछ उदास सा,
कुछ हैरान सा,
.....
मगर उसकी नजर
दूर
उसी दिशा में
एक तारे
पर थी
और वो तारा भी
क्या तारा था,
चमकीला,
सौम्य,
सबसे आकर्षक,
उसने तारे को
करीब बुलाया
मगर
वो नखरीला तारा,
कब उसकी सुनता,
लेकिन इस
तन्हा तारे को
भरोसा है
एक समय तो
आयेगा
ऐसा कि
वो चमकीला तारा
उसके करीब जरुर आयेगा,
..
पर डर इस
बात का
भी है कि
कहीं तारे के
आने से पहले
भौर
न हो जायें
जो
दोनों की
जिंदगी को
लील
जायेगी,
हां, वो उदास है
इसलिए भी।
©® जाँगीड़ करन kk
16_03_2017___06:00AM
और मैं, मेरी चिंता न कर मैं तो कर्ण हुँ हारकर भी अमर होना जानता हुँ
Thursday, 16 March 2017
Alone boy 10
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