रविवार, 27 सितंबर 2015

मेरे ख्वाब

ये कैसे ख्वाब

हम दोनों हो साथ,
ट्रेन के सफर में,
मैं खो जाऊँ,
तुझमें इतना कि
जंजीर खींच दुँ,
जुल्फें तुम्हारी समझकर

तब तुम चिल्लाओ
अबे ट्रेन में
पहली बार
बैठ रहो हो
क्या?

हम दोनों साथ में हो,
बाइक पर,
मैं खो जाऊँ तुझमें इतना
कि बाइक की
रेस को
समझ बैठुँ
कान तेरे,
और उमेठने के चक्कर में
रेस बढ़ा दुँ,

फिर तुम चिल्लाओ
अबे!! खड्डे देखकर
तो चला.

हम दोनों लैटे हो
अपने खेत की मेड़ पर
मैं तुझमें खोया हुआ रहुँ,
आ जाय्ं कहीं से साँप
और मैं समझकर तुम्हारा हाथ
झट से पकड़ कर रख दुँ
सीने पर अपने,
तब तुम चिल्लाओ
अबे!! वो साँप है
खा जायेगा.

हम दोनों सर्दी की
चाँदनी रात मे,
बैठे हो छत पर
मैं तुझे देखुँ,
फिर चाँ द को देखुँ,
चाँद में तुम्हारा अक्स देखुँ,
इतना खोके देखुँ
कि तुम ऊठकर चली
भी जाओ तो भी
चाँद में तुझे देखकर देखता ही रहुँ
फिर थोड़ी देर बाद
आकर
तुम चिल्लाओ,
अबे!! ठंड लग जायेगी,
सोना नहीं है क्या?

रोज सुबह तुम्हारे हाथ की,
गर्म चाय बिस्तर में ही,
उसी चाय की धुंध में
ख्वाबों की तस्वीर बनाऊँ,
धुँध में जो देखता रहुँ तुमको,
चाय को भी भूल जाऊँ,
फिर तुम चिल्लाओ
अबे मास्टर!!
स्कूल नहीं जाना है क्या?

ख्वाब है ये मेरे,
ख्वाब ऐसा भी कि कब
ये ख्वाब पूरे हो,
तुम सुनाओ मुझे,
खनक चुड़ियों कि
मैं इस खनक में ही खोया रहुँ..
ख्वाब हाँ
मेरे ख्वाब

©® करन_kk

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