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बेटी तो बेटी होती है

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बचपन  से ही  तो  वो  सयानी  होती है,
अरमानों  की  उसके  कुरबानी  होती है।कभी  माँ की ममता सी बन जाती है वो,
बहिन मेरी कुछ ऐसी होती  सयानी है।बन के जब वो दुल्हन पिया के घर जायें,
माँ भवानी की जैसे कोई कहानी होती है।कभी बनी वो कल्पना तो कभी बनी सुनिता,
देश के लिये कुरबान इनकी जवानी होती है।कौन  कहता है  कमजोर  होती है बेटियाँ,
पिता की अर्थी ऊठाकर वो मर्दानी होती है।नमन करूँ मैं बेटियों को बारंबार ही 'करन',
एक जिंदगी में छिपी कई जिंदगानी होती है।
©® जाँगीड़ करन kk
31/05/2016_01:00 pm

झील किनारे

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समय की ताल पर  कदम थिरकने लगे है।
दिल में बसे अरमाँ फिर से मचलने लगे है।।उतरा  है चाँद मेरा  झील किनारे दुबारा से
ख्वाब मेरे देखो ये फिस से महकने लगे है।।मैं गुमसुम सा रहता न जानें किस दुनियाँ में,
लोग मुझे अब पागल आवारा कहने लगे है।।मेरी मोहब्बत की दास्ताँ जो सुनी बादलों ने,
देखो तो वो भी खुशी से अब गरजने लगे है।।मुसाफिर  को जब  आवाज दी अजनबी ने,
देखो  चलते  कदम भी अब ठहरने लगे है।।पल जो बितायें है करन ने  संग चिड़िया के,
कि स्वर  मेरे फिर  से कुछ चहकने लगे है।।
©® जाँगीड़ करन KK
19-05-2016... 8:00 am
फोटो--साभार इंटरनेट

जीवनचक्र 2030

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घटनाक्रम -- 15 मई, 2030
"हैलो डार्लिंग!!! ऊठो भी अब" लगभग चादर खींचते हुए मैं बोला
"गुड मॉर्निंग अंकल!! आप भी ना!!!! अब तो छुट्टियाँ है शांति से सोने दीजिये।" नितेश ने आँखें मलते हुए कहा।
"आज कितनी तारीख है? तुम्हें मालुम है ना!"
"हाँ!! 15 मई!! पर इससे क्या?"
अरे!! तुम भूल गये? ऊठो!! अपना मुँह धोओ! सब याद आ जायेगा"
"ओहो! मुझे सब याद है अंकल! आज चिड़िया आंटी का बर्थडे है। और मुझे क्या करना है यह भी पता है।"
"अहा!! लव यु डार्लिंग! तो रेडी हो जाओ! मैं नाश्ता तैयार करता हुँ।"
"ओके अंकल!"
(नितेश बाथरूम में घुस जाता है , और मैं किचन में)
(थोड़ी देर बाद नाश्ते की टेबल पर)
"अंकल!! एक बात बताओ!"
"हाँ!! पुछो ना!"
" आपको मैं पिछले दस साल से देख रहा हुँ चिड़िया आंटी का बर्थ डे मनाते हुए पर आज तक चिड़िया आंटी नहीं आई कभी और न कभी आप मुझे मिलवाने ले जाते हो"
"बेटा!! एक दिन वो आयेगी"
"यह तो दस साल से सुन रहा हुँ, मगर अब तक नहीं आई!! और अब किस लिये आयेगी?"
"एक गिफ्ट का कुछ …

आवाज का जादु

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.....................आवाज का जादु......................
______________________________________जब दूर कहीं पे चिड़िया चहके लगता है कि तुम हो,
जब कहीं मंदिर में घंटी बजे तो लगता है कि तुम हो।जब सूनी दोपहर में कहीं पेड़ की छाँव तलें सोया हुँ,
हवा से पतों की सरसराहट हो तो लगता है कि तुम हो।कभी साँझ ढलें गाय रँभाती है तो लगता है कि तुम हो,
चुल्हें की खटपट आवाज से युँ लगता है  कि तुम हो।स्कूल में जब मैं वर्णमाला के उच्चारण करवाता हुँ,
तो क से कबूतर की ध्वनि पर लगता है कि तुम हो।नदियाँ के पानी की कल कल की ध्वनि में भी तुम हो,
कहीं हिरणों की पदचाप सुनँ तो लगता है कि तुम हो।जब मोबाइल में बजती है तुम्हारी पसंदीदा रिंगटोन,
और स्क्रीन पर उभरता फोटो तो लगता है कि तुम हो।जब तन्हाई की रात में बैचेन सोया चाँद को निहारता हुँ,
दिल की धक धक से कुछ ऐसा लगता है कि तुम हो।।हाँ यह सब तेरी आवाज का ही तो जादु है करन,
चिड़िया रूबरू न सही पर युहीं लगता है कि तुम हो।
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©® जाँगीड़ करन KK
13/05/2015_5:00am morning