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A letter to swar by music 32

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Dear swar,
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मौसम ने पुकार सुनी है मेरी शायद,
यह सुनी सी नदी भी कल कल करने लगी।
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सुनो,
मैंने अपने पिछले एक पत्र में जिक्र किया था ना कि मौसम भी तुम्हारी तरह बेरूखा हुआ जाता है शायद... मगर देखो ना!!
सावन आया है, हां!! सावन तो जिंदगी के लिए खुशियों की सौगात लेकर आया... तेरी जूल्फों सी घनी काली घटाएं, तेरी मुस्कान सी झमाझम बारिश, तेरी लहराती चाल सी यह बल खाती हुई नदी......
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गीत कोई गुनगुनाना सीखें तो नदी हाजिर है,
इसके सुर में सुर मिला कर गाओ तो जरा।।।।
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हां प्रिये,
पिछले कई दिनों से सबके चेहरे पर चिंता की लकीरें थी कि बारिश होने के आसार कम है तो जानें क्या होगा अब!! मैंने कहा था कि हर चेहरे पर उदासी है, हां!! मैं भी तो उदास था मौसम की इस बेरूखी से!!
मगर अब!! अब जब मौसम ने अपना रंग दिखाना शुरू कर दिया है तो सबके चेहरे खिल से गये है, हर तरफ खुशी के गीत गाए जा रहें हैं, सबकी जिंदगी में खुशनुमा पल आया है.....
हां!! मैं भी तो खुश हूं, सबके चेहरे पर जो खुशी देखता हूं तो खुश होना लाज़मी भी है.....
पर!!
पर सुनो जान!! यह सावन भी वैसा ही है जैसा कि पिछला साव…

नश्तर

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हर तरफ बस बीमार निकलें,
मोहब्बत में ज़ार ज़ार निकलें।तोहमत मुझ पर जो लगा रहे,
वहीं आज फिर दागदार निकलें।टूटी नैया तो है घायल खिवैया,
समंदर से कैसे आर पार निकलें।जिनकी नज़रों से दिल घायल है,
उनके दिल से अब अंगार निकलें।औकात अपनी कहां हुस्न के आगे,
नज़रें ठहर जायें जो वो बाज़ार निकलें।जिंदगी का नश्तर चलता रहा करन,
निभायेगा कौन रिश्ते तो हजार निकलें।©® Jangir Karan kk
29_07_2017

A letter to swar by music 31

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Dear swar,
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"जिंदगी कुछ हद तक हैरान हैं,
किस्मत का जाने कैसा पैगाम है।
राहें कौनसी थी क्षआज करन की,
तुमसे मुलाकात ही मगर अंजाम है।।
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शुक्रिया इस मुलाकात का। मुलाकात बहुत छोटी सी थी मगर दिल को काफी दिनों बाद थोड़ा सुकून मिला। मगर पता नहीं क्यों पर मैं जानता हूं कि इन सबका कोई मतलब नहीं है फिर भी दिल कहता है कि तुमसे युही मुलाकात होती रहे।
कभी कभी तुम सामने ऐसे ही आ जाओ तो मैं बेफिक्र जी सकता हूं। हां, मैं तुम्हें तंग नहीं करूंगा।
कल जिद थोड़ी ज्यादा हो गई ना!!! हां, उसके लिए सॉरी।
सॉरी तो क्या?
तुम वैसे भी बहुत अकड़ु हो?
इतना कहने के बाद तैयार हुई.... भला इतना भी कोई गरज करवाता है।
खैर! टेबल नंबर १ याद रहेगी अब। हालांकि दिन में कितने ही लोग उसी जगह बैठकर आइस्क्रीम खाते होंगे.. पर मैं,
मैं अब जब भी वहां जाऊंगा तो वहीं टेबल ढूंढूंगा, हां,
नाखून से वहां तुम्हारे सामने ही तो मैंने तुम्हारा नाम लिखा था ना...उस टेबल का अब मुझसे विशेष रिश्ता सा बन गया है, मेरे एहसास जुड़ गए हैं अब.....
बाकी मैं जानता हूं तुम्हारे पास वक्त नहीं है, जरा सा भी नहीं…

A letter to swar by music 30

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Dear SWAR,
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आसमां को ताकता हूं कि कहीं बादल तो नजर आयें,
आंखों के बादल मगर है कुछ देखने भी ना दें मुझको।
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देखो तो यहां,
मेरे गांव के लोग बादलों का इंतजार कर रहे हैं और बादल है कि बस एक मामूली सी झलक दिखला कर जानें कहां गुम हो गए हैं, किसानों के चेहरे की उदासी मैं खूब समझता हूं पर ये बादल भी तो अपने बस में नहीं है ना,
सबके अपने अपने नसीब है कोई किसका इंतज़ार करता है, कोई किसका?
और जानता कोई नहीं कि इंतजार कब खत्म होना है या होना भी है या नहीं!!
मगर करें भी क्या जब सबने अपने अपने हिस्से की किस्मत में यहीं लिखा!
और यही करना भी है...
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देखो,
आज फिर मैं वहीं पर जा बैठा है जहां पर बैठ कर अक्सर मैं तुमसे जिंदगी की बातें किया करता था,
मालूम है ना,
जैसा मेरी जिंदगी में रूखा रूखा है वैसा ही यहां पर भी रूखा रूखा है......
मैं आज यहां काफी समय बाद आया हूं,
मुझे मालूम है कि बिन बारिश यहां का हाल यही होना है, मगर बहुत उदास हो गया हूं आज यहां आकर....
एक इस जगह की ऐसी नीरसता और दूसरे उन लम्हों की कमी जिनमें हमने सपने बुनकर जिंदगी की नींव रखी थी.....
तुम्हें याद है ना मैं …

बस एक मुलाकात

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कहीं तो  कोई बात हो,
जिंदगी से मुलाकात हो....
बेचैन दिल की कराहट बोले,
धड़कन का बस साथ हो....
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आसपास ही भटकता है,
मन कहां समझता है,
उम्मीद बस यह रखता है,
कभी उसे भी अहसास हो......
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सुना पथ है,
आगे झंझावत है,
डरता नहीं मैं हार से,
हाथ में बस तेरा हाथ हो........
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किस्मत कोई खेल नहीं,
जब रेखाओं का मेल नहीं,
सुना आंगन तब भी बोलें,
स्वर का कोई साज हो....©® जांगिड़ करन kk
05_07_2017__6:30AM

सावन आया है

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सावन ने
तो
जैसे आज
धरती को
खुशहाल किया है।
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बादलों ने
गरज कर
भूमिपुत्रों का
आव्हान किया है।
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बरसती बूंदों ने
सजनी का
चेहरा
क्या कमाल किया है।
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खेतों पर
बजते
घुंघरूओं ने
जीवन का
आधार दिया है।
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भारत बसता है गांवों में
धरा ने फिर
संदेश दिया है।
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©® करन जांगिड़ kk