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Smiling queen

चित्र
चाँद थोड़ा मुस्कुराना तो जरा,
रात अंधियारी भगाना तो जरा।मैं इक स्वप्न हूं जिंदगी  का,
तुम नींद में बुलाना तो जरा.....मैं  तरन्नूम  की बहती हवा,
जुल्फें तुम लहराना तो जरा...ओस की इक प्यासी बूंद मैं,
अपने लबों से लगाना तो जरा...तेरे दिल का ही स्वर हुं मैं,
हौले से गुनुगुनाना तो जरा...भोर तेरे आँगन  की है करन
ओ चिड़िया चहचहाना तो जरा...
©® जाँगीड़ करन KK
29/01/2017___6:00AM

ऐसे वतन के रखवाले

चित्र
जान हथेली पर लेकर चलें,
ऐसे वतन के रखवाले।
हर तकलीफ को यें झेलें,
ऐसे वतन के रखवाले।।
।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।
सीना तान के चलते जायें,
एक कदम न पीछे हटायें,
कभी न अपनी पीठ दिखायें,
ऐसे वतन के रखवाले।।
।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।
बर्फ की ऊँची दीवारों में,
साहस समंदर किनारों में,
कभी रेत के धोरों में,
ऐसे वतन के रखवाले।।
।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।
ठिठुरती है जमाने वाली,
रेत भी होती है जलाने वाली,
करते हैं फिर भी रातें काली,
ऐसे वतन के रखवाले।।
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सीना छलनी छलनी होता,
फिर भी साहस कम नहीं होता,
नाम वतन का जुबां पर होता,
ऐसे वतन के रखवाले।।
©® जाँगीड़ करन kk
25/01/2017__7:30AM

Alone boy 3

चित्र
किसी ठिठुरती
रात में
एक तन्हा लड़का
छत पर
बैठकर
निहारता है
चाँद को..........
मन ही मन
चाँद से
कोई सवाल
करता है...
और फिर जानें
क्यों
आँख से
पानी की इक
बूंद टपकाता है.......
अब
फर्श पर पड़ी
बूंद में
वो अपना चाँद
देखता है........
और युहीं
अपने चाँद
के दीदार की खातिर
वो रातभर
अश्रु बहाता है......
हां.....
एकांत में
एक लड़का............
©® जाँगीड़ करन KK
20/01/2016__19:30pm

दस्तक

चित्र
कल रात
दरवाजे पर
एक दस्तक हुई,
गहरी नींद में
सोया था मैं
मगर आँख खुल गई.........
।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।
दरवाजे को
खोला मैंने मगर
कोई चीज नजर नहीं आई,
मैंने सोचा शायद
नींद में युहीं
यह आवाज है आई.......
।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।
मगर जैसे ही
मैंने
दरवाजे की कुंडी लगाई,
हवा के इक
झौंके सी कोई
कान में फुसफुसाई..........
।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।
मैं तुम्हारी
हार हुँ
लो मैं आ गई,
मेरी हालत क्या बताऊं
आँखों में
काली छाया छा गई............
।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।
नींद न जानें कहां गायब
बस चिंता की
लकीरें छाई,
किस गलती की
सजा आज
मैंने यह पाई..................
।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।
हड़बड़ी में
इतना ही पूछा मैंने
बुलाया नहीं तो क्यों आईं,
बोली वो तमतमाकर
जीत ने
तुम्हें कितनी आवाज लगाई..............
।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।
लेकिन तुम ठहरे हठी
तुमने उसकी
हर दस्तक ठुकराई,
अब बारी मेरी है
मैं बिन पूछे
इसलिए ही चली आई...............
।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।
मैं आज से रहुंगी
तुम्हारे मन में
बनके परछाई,
सोच लो बची जिंदगी में
मेरी गुलामी
रास आई............................…

A letter to swar by music 19

चित्र
Dear SWAR,
..........
... राहों की बात.. दिल के साथ....
... कुछ मिठ्ठी याद.. और तेरा हाथ....
........................
...पदचिह्नों की टोह... ऐसे बैकल हुँ....
...बिसरा बैठा मैं... सारे होश हवास....
।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।सुनो पार्टनर,
यह वक्त ही है जो हर एक को अलग अलग अहसास कराता है.. कभी मंजिल से दूर भटकाता है तो कभी भटके हुए राही को मंजिल दिखाता है और हम तो मुसाफिर है.. इसी समय की चाल के साथ कदमताल करते हुए चलते रहने की कोशिश भर करते है। एक और बात है कि यह वक्त ही तय करता है कि सफर में हमराही कौन होगा? कौन, कब, किस मोड़ पे साथ छोड़ जायेगा? यह सब केवल और केवल वक्त के हाथ में है।
और सुनो......
यह दिसम्बर की सर्दी है, गुलाबी से कुछ ज्यादा असर दिखाने लगी है.. सुबह उठकर रजाई से बाहर निकलता हूं तो सर्दी का असर मुंह पर ऐसे होता कि मुझे लगता है जैसे तुमने छु लिया हो अचानक से.. और मैं किसी ख्याल में खोया अचानक तंद्रा से जाग जाता हुँ.... हां...
ख्याल भी कुछ कुछ ऐसा था.........
शरद ऋतु के साथ ही समंदर भी अब शांत रहने लगा, मगर यह शांति कब तक रहनी है, यह शांति भी संकेत है आने वाले…

बढ़ते जाओ

चित्र
मेरी प्रीत
तुम्हारी
राह न रोकेगी,
अपने
लक्ष्य की ओर
तुम बढ़ते जाओ.......
.............................
बीच राह में
कोई
दरिया भी आयेगा,
मेरी हथेलियों का
पुल
चढ़ते जाओ........
.........................
गर्म रेत
झुलसायेगी
तुम्हारे पाँव,
मेरे आँसुओं से
तलवे
भिगोते जाओ......
.........................
आँधी या
तुफाँ से
घबरा न जाना,
बुलाना
करन को कि
अब तो आ जाओ......
.........................
© ® जाँगीड़ करन kk
10/01/2017__7:00AM

A letter to swar by music 18

चित्र
Dear swar,
..................
"कुछ धुएं की फितरत है या नमी आँखों में,
सूरज की रोशनी भी मुझको चाँद सी लगे है।"
........................................
हां,
तो तुम्हें मेरा पिछला पत्र मिल गया है और तुमने बताया कि तुम्हारे शहर के दृश्यों से पत्र में वर्णित दृश्य काफी मिलते-जुलते हैं। अहा!!! मैं फिर तुम्हारे शहर की सैर कर आया मतलब?
मगर एक बात न मानती तुम, उन दृश्यों में खुद को नहीं देख पा रही हो? मगर क्यों?
मगर देखो ना!! मेरा पागल मन तो वहां तुम्हारे होने का अहसास कर रहा था। या शायद तुम झूठ बोल रही हो?
खैर छोड़ो!¡! तुम्हें पत्र अच्छा लगा जानकर बहुत खुशी हुई!!!
और अब आगे सुनो......
उस जगह पर ताल की ओर कुछ पदचिह्न दिखाई दिए मुझको, मैं तुम्हारे पदचिह्न ढूंढने की कोशिश करने लगा...  शायद तुम ताल के किनारे हो......
मगर शायद तुम वहां से जा चुकी थी, मगर तुम्हारी खुशबू वहां मौजूद थीं, तब भी....
और इस समय बहुत से पशु पक्षी ताल पर पानी पीने आयें हुए थे....
और तुम्हारी वो बकरियां भी पानी पीकर पहाड़ी की तरफ चलने लगी, तो तुम भी फिर फटाफट खेलना छोड़कर भागी...
शायद बकरियों की चिंता हो आई या मु…

A letter to swar by music 17

चित्र
Dear swar,
..................
"All the parameters are failed to judge the real statistics of my heart, only the feeling of yours appearing make it blessings"
................
First of all missing you,
Some of my previous days were something different from the life, I feel the moments with my heart.
& I found that nothing is important then the purity of heart. You know it very well.........
............
Now listen...
As you know that today it's a special day for me, because it's my birthday today. Everyone think that it's a great day for me, & I should celebrate it. I have to organise a party for it.
Yaa......
I am also preset for it. I also love to enjoy this day, the great day of my life.
But the situation which is created by the time are too suspensive for me that I can't enjoy with heart.
Yaa my love....
The time is making me too serious to learn from the stones of the way of my life. Everytime I had a smile on my face to disclose the world, but no…

धुंध से परे

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आसमाँ में हरियाली छाई अभी अभी।
तुमने चुनर अपनी लहराई अभी अभी।।अब अपनी पलकों के दरवाजे खोल दो,
मुर्गे ने दूर ऊधर बांग लगाई अभी अभी।।मौसम भी बड़ा बेईमान हुआ जाता है जाना,
क्या  तुमने  ली  है  अंगड़ाई  अभी  अभी।।मैं छत पर सिर्फ इसलिए ही ठिठुरता रहा,
तुम  जैसी  कोई  नजर आई अभी अभी।।हवा  में  यह  कैसी  धुंध फैली है यहां,
तुमने गीली जुल्फें छटकाई अभी अभी।सूरज भी आज चाँद सरीखा लगे मुझको,
जैसे कि तुमने बिंदिया लगाई अभी अभी।मन का  मयूरा भी  नाचे छन  छन अब तो,
तेरे पैंजन का स्वर दिया सुनाई अभी अभी।कभी  तुम्हारे शहर  में भी  हम आयेंगे करन,
इन नजारों में तुम्हारी याद आई अभी अभी।।
©® जाँगीड़ करन kk
02/01/2017__06:00AM

A letter to swar by music 16

चित्र
Dear SWAR,"बस तारीखे और साल बदलते है
ज़िन्दगी की कशमकस मगर वही है | "
................
तुमने कल के अपने पत्र में कहा था कि आज में कविता ज़रूर लिखू मगर सुनो | मगर सुनो!! आज में कविता नहीं तुम्हारे पत्र का जवाब लिख रहा हु| और जवाब में पिछले दो दिन का अहसास लिख रहा हु | क्युकि इन दो दिनो को मैंने कुछ अलग अंदाज़ में जीने की कोशिश की है| हर तरह की विलासिता से दूर सिर्फ प्रकृति का स्नेह वो पल जो लोग सादियो पहले जीते थे| तुम्हे अंदाज़ा नहीं होगा कि में कितना सफल रहा हु| में जानता हु कई लोगों को इससे आपति हुई है मगर में ऐसा ही हु| कभी कभी यह ज़रूरी भी लगता है| खेर अब चिंता न करो में आ गया हु न तुम्हारे पत्र का जवाब लेकर| और इस पत्र में वही उन दिनों को बयां कर करूँगा|
में एक गाँव के दृश्यों की काल्पना में सिर्फ तुमको देख पता हु| में दृश्यों में तुम्हारी मोजुदगी दिखूंगा तूम अपने शहर में खुद को उन दृश्यों में महसूस करना, आनंद आएगा तुम्हे भी| तुम समझ रही हो न क्या कहना चाह रहा हु| हा || बस में जो लिख रहा हु उस हर पंक्ति में खुद को महसूस करना| जैसे कि ये सारी घटनाये तुम्हारे शहर में हुई हो…