संदेश

September, 2016 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

समर्पण

चित्र
खुद से  कब  का हार चुका हुँ,
खुद  को खुद  से  हर चुका हुँ।हर शख्स  में  जिंदा रहता हुँ,
खुद में  कब  का मर चुका हुँ।तुफान से बेखबर मैं नाविक हुँ,
हाथ में पतवार को धर चुका हुँ।तुम मुस्कान ही देख पा रहे हो ना,
आँख में आसुँओं को मार चुका हुँ।खुशियों का गुलदस्ताँ तुम ही रख लो,
मैं गम से अपना दामन भर चुका हुँ।और भला क्या चाहिये 'करन' तुमको,
मैं  स्वर भी  तो अर्पण  कर  चुका  हुँ।
©®जाँगीड़ करन
28.09.2016....20:40PM
फोटो -- साभार गुगल

तीन दौहे(गौरी)

चित्र
गौरी  तेरे  नैन  से,  ऐसे  निकले  तीर।
मैं जो आया राह में, मन यह हुआ अधीर।आओगे  जब  अँगना, दुँगा  नैन बिछाय।
मिलने को बैताब है, दिल भी धड़के नाय।।तुम बिन तो यह जिंदगी, लगे धधकती आग।
कैसे  तुमको  बतलायें, तुम बिन सुना फाग।
©®जाँगीड़ करन
फोटो - साभार गुगल

मुस्कुराहते हुए चल

चित्र
अपनी पलकों में मीठे सपने बसाते हुए चल,
चाँद तारों से गहरी रात को सजाते हुए चल।हैरान न हो कि  आस्तीन  के साँप  है यहाँ,
अपने  दम से तु  इनको  बजाते हुए चल।लो वक्त ने फिर कोई आवाज दी है मुझको,
होठों पर तराना मोहब्बत का गाते हुए चल।नफरत की आग में इंसाँ जला रहा खुद को,
घने  बादल  प्रेम के  तु  बरसाते  हुए चल।राह में मुश्किलें तो हर पल आनी है करन,
करके सामना तु इनसे मुस्कुराते हुए चल।
©® जाँगीड़ करन KK
25/09/2016__16:00PM

मेरे खत के जवाब में

चित्र
मेरे खत को पढ़ कर के मुस्कुरा रहे हो ना,
किस तरह मिलुँगा तुमसे शरमा रहे हो ना।मन बहका बहका सा मेरा हर पल रहता है,
आँखों के प्याले से तुम पिला रहे हो ना।तुमको तो मालुम है कि मैं क्या क्या सुनुँ,
कँगन झुमका कब से खनखना रहे हो ना।ये ही काफी हो जायेगा कत्ल को मेरे तो,
मगर फिर भी जुल्फें गीली लहरा रहे हो ना।तुम्हें ख्याल भी है कि तुम बिन उदास करन,
मगर दूर रहकर के तुम मुझे सता रहे हो ना।©® जाँगीड़ करन KK
18/09/2016_8:00AM

A letter to swar by music 10

चित्र
DEAR SWAR,
.......................
First of all missing you a lot, I can't tell in words that how much I am feeling alone without you...
............मुझे मालुम है कि जिंदगी ठहरती नहीं किसी के इंतजार में, मुझे यह भी पता है छोड़ दें दुनियाँ  सारी किसी के लिये, मुनासिब नहीं ये आदमी के लिये.....
मगर कोई बात तो है जो यह जहाँ नहीं जानता,
कोई बात है जो दिल के किसी कौने में अब भी सिसकती है,
कोई बात है जो लब पर आती तो है मगर कोई सुन नहीं पाता,
कोई बात है जो आँखों से टपक पड़ती है जब अँधेरे में चाँद को ढुँढ रहा होता हुँ मैं,
हाँ तन्हा रात की कोई कहानी फिर भी....
हाँ समंदर की मोजों में रवानी फिर भी....
तुम बिन न जिंदगी है सुहानी फिर भी....
बिन ख्वाब के इसे है बितानी फिर भी.....
...........!!!!!............
जिंदगी की राह पर तुमने देखा होगा कि मस्ती का दीवाना मैं किसी परवाह किये बगैर कैसा चलता रहा था, तुमने देखा था कि मैं सिर्फ जिंदगी को हँसते हुए मुस्कुराहते हुए गुजारना चाह रहा था.... न मैं वक्त की परवाह करता था न दुनियाँ की, बस हर एक से मुलाकात में हँसीं, हर एक से दोस्ती, न कोई गिला किसी से …

ये रही जिंदगी

चित्र
केश की लटों में,
कानों की बालियों में,
रही ऊलझती जिंदगी।सुर्ख लाल होठों पर,
तीखे नैन से,
रही फिसलती जिंदगी।चूनर के पल्लु सी,
कमर के चहुँ ओर,
रही लिपटती जिंदगी।चुड़ियों से सजी,
कोमल सी हथेली,
रही चूमती जिंदगी।ख्वाब में जो सुना,
स्वर उस पेंजन का,
रही खनकती जिदगी।
©® Karan dc
08/09/2016_10:00AM