Tuesday, 27 September 2016

तीन दौहे(गौरी)

गौरी  तेरे  नैन  से,  ऐसे  निकले  तीर।
मैं जो आया राह में, मन यह हुआ अधीर।

आओगे  जब  अँगना, दुँगा  नैन बिछाय।
मिलने को बैताब है, दिल भी धड़के नाय।।

तुम बिन तो यह जिंदगी, लगे धधकती आग।
कैसे  तुमको  बतलायें, तुम बिन सुना फाग।
©®जाँगीड़ करन
फोटो - साभार गुगल

No comments:

Post a Comment

प्रकृति और ईश्वर

 प्रकृति की गोद में ईश्वर कहें या ईश्वर की गोद में प्रकृति ......  जी हां, आज मैं आपको एक ऐसे प्राकृतिक स्थल के बारे में बताऊंगा जहां जाकर आ...