संदेश

April, 2016 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

गौरी( दो राजस्थानी दोहे)

चित्र
1.गौरी  थारा  रूप  ने,  देख  समंदर  आज।
   आपो तो वो खो दियो, उलटा करे जहाज।।
.........................व्याख्या- प्रस्तुत दोहे में एक आवारा अपनी भोली लेकिन बहुत ही सुंदर प्रेमिका के बारे में बखान करता है। यह पंक्तियाँ तब लिखी गई जब वो आवारा अपनी प्रेमिका को समंदर के बीच से नाव चलाते हुए देखता है।। आवारा अपनी प्रेमिका से कहता है कि ए स्वप्न सुंदरी(गौरी) तुम्हारे को जब आज समुद्र ने पहली बार देखा है तो समुद्र का हाल भी बुरा है, उसके मन की लहरे उत्पन्न हो गई है, फलस्वरूप यह बहुत ही उत्तेजित हो गया है और इसमें तुफान आ गया है, और ये बाकी सब नाविकों की नावें पलट रहा है। यहाँ आवारा का सीधा से अपनी गौरी को संकेत है कि वो अपने रूप का जलवा वहाँ न दिखायें जरा घुँघट निकाल लें, ताकि समुद्र शांत हो जायें।
.................
Explanation - in this couplet the Madden lover describing about her simple but beautiful partner. These lines are written when the lover saw his partner in the middle of sea with her boat. Now the lover ask to his lover - O dream Queen, when the sea see you for first time today it…

तेरी महफिल

चित्र
महफिल में भी खुद को तन्हा पाया हुँ।
जाने खुद को किस मोड़ पे ले आया हुँ।।ये ऊजाले ये चकाचौंध सब बैगाने है,
मैं अंधेरी गुफा में रहता इक साया हुँ।जरूरतों से बदल जाते है रिश्तों के मायने,
हर मोड़ पर जमाने के लिये आजमाया हुँ।अहसास खुद के होने का भी नहीं है मुझको,
क्या फिर भी मैं कोई चलती फिरती काया हुँ।तुमने गौर से देखा नहीं अपने दिल में,
मैं और बस मैं ही तो इसमें छाया हुँ।और तो मालुम ही नहीं क्या बात है 'करन',
पर सोचुँ तुझे ही और तेरा ही 'स्वर' गाया हुँ।
©® जाँगीड़ करन KK
14/04/2016_20:50 pm

A letter to swar by music 6

चित्र
डियर स्वर,हाँ अब यह 212 है। तुम्हें समझ आ गया है कि मैं क्या कहना चाह रहा हुँ। तुम खुद बहुत समझदार हो। यह मेरा तुम्हें लिखा छठा पत्र है, पर तुमने कभी जवाब दिया, पर मेरी तो आदत बन गई है तुम्हें लिखने की!!!
तुम इन्हें शायद पढ़ती भी हो या नहीं, नामालुम???
।।।।।
खैर,
आज तुम्हें बता रहा हुँ कि अभी मैं वापस उस पोखर के किनारे जो आम का पेड़ है ना वहाँ गया था। घर पे मन नहीं लग रहा था तो थोड़ी देर के लिये ठंडी हवा में आराम करने की सोची!!!
पर वहाँ बैठकर तो मुझे वो सब पुरानी बातें याद आने लगी।
कैसे हम वहाँ पर एकांत में बैठकर गुफ्तगुं किया करते थे।।।
ओह.....
छोड़ो उन्हें वो तो तुम्हें भी मालुम है पर अभी भी देखो मैं वहाँ अकेला हुँ पर तुम्हें महसूस कर सकता हुँ।।
पता है जब मैं वहाँ बैठा था तो पेड़ पर पत्तों की सरसराहट सी हुई, मुझे लगा कि तुम इन पत्तियों के पीछे से झाँक रही हो, बस पास आने से कतरा रही हो शायद।।।
और फिर इन्हीं पत्तों के बीच कुछ फड़फड़ाने की आवाज आई, तुम्हारे होने का पक्का अहसास हो गया, मगर पता है वो एक चिड़िया थी जो उड़ कर दुसरे पेड़ पर जा बैठी।
तुम भी तो चिड़िया हो।।।
।।।।।।।।।।।।।।।।।…

तेरा आफताब

चित्र
तेरी मोहब्बत में चाहे बदनाम सा हो जाऊँ मैं,
जो तु चाँद है अगर आफताब सा हो जाऊँ मैं।कभी इन्हें तुम ऊलझा के पुकारना तो सही,
जुल्फें तुम्हारी कभी तो खुद सुलझाऊँ मैं।अजीब से शहर में बसेरा है तेरा ओ चिड़िया,
जब भी सोचुँ तुझे यहाँ गलियों में खो जाऊँ मैं।एक तेरे नाम से पहचानते है लोग मुझे अब,
तुझे भूलकर क्यों गुमनाम सा हो जाऊँ मैं।कभी बैठकर नजदीक मेरे तुम देखो तो सही,
स्वर तेरा ही हरदम प्यार से अब गुनगुनाऊँ मैं।©® जाँगीड़ करन KK
08/04/2016__10:50 AM