सोमवार, 24 अप्रैल 2017

Alone boy 20

A boy
All in in alone
Goes to
A shop
At a
Fashion shop,
Just for
Watch out
What things
Are to be
Sold there.
But as he
Look
These things
He just think
About the MOON
Of his life.
He look the
Rings of glass,
& Just dream the
Soft hand of his
Partner,
Just imagine
How he will
Coat these
In her hand.
And how she
Will got
Gloom on her face
With blush.
And they
Both
Got
Addicted of
Each other
In attraction of
Hearts.
Just watch
In each other's eyes.
For
A long time.

Suddenly the shopkeeper
Ask the boy for
What he needed.
And in hurry
He just says
"A bunch of glass's rings"

©® जाँगीड़ करन kk
23_04_2017__19:00PM

Alone boy 20

A boy
All in in alone
Goes to
A shop
At a
Fashion shop,
Just for
Watch out
What things
Are to be
Sold there.
But as he
Look
These things
He just think
About the MOON
Of his life.
He look the
Rings of glass,
& Just dream the
Soft hand of his
Partner,
Just imagine
How he will
Coat these
In her hand.
And how she
Will got
Gloom on her face
With blush.
And they
Both
Got
Addicted of
Each other
In attraction of
Hearts.
Just watch
In each other's eyes.
For
A long time.

Suddenly the shopkeeper
Ask the boy for
What he needed.
And in hurry
He just says
"A bunch of glass's rings"

©® जाँगीड़ करन kk
23_04_2017__19:00PM

शुक्रवार, 21 अप्रैल 2017

Alone boy 19

कि
सूरज
को देखो,
क्षितिज से उठकर
अपनी यात्रा पे
निकला है,
शायद किसी
साथ की
तलाश उसे भी है,
देखो तो
उसे
इस नीले
आसमान में
वो तन्हा ही
निकल पड़ा है,
हां,
उसे
मालूम भी है कि
उसे
अपना काम तो
करना ही है,
हां,
निगाहें अब भी
उसकी
क्षितिज की
ओर है,
कि
कब मिलन होगा,
और फिर जानती हो ना,
शाम हो जानी है,
ऐसे ही
मैं
सूरज की तरह
अनवरत
हुं,
जिंदगी की राह में,
तेरी तलाश में,
पर
डर
अब भी
है कि
मिलन से पहले
कहीं
जिंदगी की
शाम न हो जायें।
©® जाँगीड़ करन kk
21_04_2017__8:00AM

बुधवार, 19 अप्रैल 2017

Alone boy 18

महफिल में
देखो तो
चारों ओर
उल्लास है,
हर चेहरे
पे आज अलग
ही रौनक है,
यहां संगीत की
स्वर
लहरी गूंज रही है,
चारों तरफ
रोशनी का सैलाब है....
मगर कोई
यहां भी
उदास है,
खुद को
तन्हा तन्हा
महसूस
करता है....
उसकी आंखें
हर वक्त
इक शख्स की
तलाश में
इधर उधर
झाँकती है,
जानती है ये
भी
कि वो
यहां
नजर नहीं
आनी है.....
मगर उस
तन्हा
दिल के
पास
और कोई
चारा भी तो नहीं......
©® जाँगीड़ करन kk
19_04_2017__22:00PM

माँ

हर अहसास की आखिरी उम्मीद होती है माँ,
मेरी  ग़ज़लों  की  किताब  सी होती  है  माँ।

मेरी हर खता को नजरअंदाज कर जाती है,
मौसम की  पहली  फुहार सी होती  है माँ।

मेरी मुस्कराहट की तो दीवानी ही रहती है,
हर चोट  की  मगर  दवा  होती  है  माँ।

बिन मां के सुना सुना कितना यह संसार है,
हर ख्वाब की मगर तस्वीर तो होती है माँ।

हर शाम बस उदास सी लगती है करन,
अंधेरे में पीठ थपथपा रही होती है माँ।

©® जाँगीड़ करन kk
19_04_2017__5:30AM

सोमवार, 17 अप्रैल 2017

हिंदी की रसधार

तुम इंग्लिश की कड़वाहट हो,
मैं हिंदी की रसधार प्रिये।

तुम यम की दूत बनी बैठी,
मैं जीवन का आधार प्रिये​।

तुम शहर का फास्ट-फूड हो,
मैं शुद्ध देशी आहार प्रिये।

लड़ाई झगड़े की तुम नानी हो,
मैं हरदम करता करार प्रिये।

जहां जहां मैं खाई देखुंं,
भरता वहां मैं दरार प्रिये।

बस तेरी कमी ही रह गई है,
बिन तेरे मन भी है बेकरार प्रिये।

छोड़ो सारे भरम अब तो,
कभी कर लो तुम भी इकरार प्रिये।

Photo from Google due thanks

©® जाँगीड़ करन kk
17_04_2017___15:00PM

रविवार, 16 अप्रैल 2017

Alone boy 17

Suno,
देखो
यह रात
गहरी हुई जाती है,
तारे
कुछ तेज
चमकते से
दिखते हैं,
दूर कहीं
कोई
शहनाई बज रही
मन में
कोई
तरंग हिलौरे ले
रही,
और फिर
देखो ना,
आँखें
अब भी
एक टक
झाँक रही
आसमान की ओर,
किसी तारे की
मुस्कान के लिये,
देखो
जरा तुम भी
क्या तारा अभी
खिलखिला,
हां,
तो तुम्हें
अहसास होगा ना,
जिंदगी भी
इसी इसी
मुस्कान की
खातिर
कुछ ख्वाब बुनती है,
हां,
पुरे हुए तो
मुस्कान,
न हुए तो
उम्मीद
पर दुनिया
कायम है......
कहो नाम
साथ साथ
हां,
हम अब भी
अहसास के
बंधन
से
बंधे हैं.......
©® जाँगीड़ करन kk
16_04_2017__21:40PM

शनिवार, 15 अप्रैल 2017

Alone boy 16

Suno.

यह मंदिर
से आ रही
घंटी की
आवाज
जिंदगी के
स्वर को
झंकृत
करती है,
कि दिल में
कोई
हलचल सी
मचती है।
कब सुनाई
देगा
ऐसे ही
तेरे पैरों
से
पायल की
झंकार जो
सुन लुँ
तो दिल
को जैसे
शुकून
मिल जायें,
और
मेरी रातों
की
नींद
भी चैन से
आ जायें,
सुना नहीं तुमने,
कोई तुम्हारी
आहट
के इंतजार में
अब भी
दरवाजे को ताकता है,
हर शाम
युहीं
मंदिर की
घंटी के संग
तेरे ख्याल में
खोया
कोई अब भी.......

©® जाँगीड़ करन KK
15_04_2017__19:20PM

Alone boy 15

देखो
तो जरा
आसमान को
तारे तो
अपनी अपनी
जगह पर है,
मगर यह
चांद
जानें कहां
छुपा बैठा है,
न इसकी
फितरत
मालुम
न ही इसके
मन की व्यथा,
शायद खुद में
किसी
उलझन को....
अरे! ऊधर देखो
पूर्व में
चांद आया
थोड़ा
शरमा रहा,
शायद
इसलिए
लालिमा लिए है,
या
रूठा हुआ हो
शायद,
मगर देखो
तारें
को विश्वास है
कि
चाँद
आयेगा जरूर
अपनी छटा से
रात को
चमकायेगा जरूर...
©® KK
14_04_2017__22:50pm

सोमवार, 10 अप्रैल 2017

Alone boy 14

और
आज भी
वो तन्हा तारा
अपनी जगह
उसी ओर निगाहें जमायें
खड़ा है।
हां,
उस चमकीले तारे
की तरफ
कुछ उम्मीद है,
कुछ अहसास है,
कुछ जज्बात है,
और फिर
उसे फिक्र भी
कि
चमकीले तारे की
चमक
सही तो है,
या मन में
वो भी पीड़ा
लिए ही
तो नहीं चल
रहा कहीं.....
मगर चमकीले तारे की
अकड़ तो
देखो,
जानें क्या ठान के
बैठा है,
जानें कहीं ओर
क्या ढुंढता फिर रहा,
कभी मन की
क्यों
सुनता नहीं.....

©® जाँगीड़ करन kk
10/04/2017___21:30PM

गुरुवार, 6 अप्रैल 2017

गुमनाम तारा

रात गहरी है
चांद चमक रहा
मगर वो तारा
जानें कहां गया
देखो रात भी
उदास है
उस बिन
और शायर की
आँख तो
कब से
ढूँढ रही उसको,
हां, देर रात
वो
नजर आया फिर
बोला
मन उदास है
इसलिए
खुद को
छुपा लिया
अंधेरे में
कोई देख न ले,
इसलिए।
और तुम शायर भी
तो
यह करते हो,
खुद को डायरी से
बांधकर,
हां,
तुम बाहर कितना
मुस्काते हो,
सारी दुनिया को
झुठलाते हो,
मगर मैंने रात में
तुमको
तन्हा देखा है,
टेबल पर टिकी कोहनी
को
आँखें छुपाते देखा है,
बिस्तर की सलवटों में
इक वजूद को
खोते देखा है,
काली अंधेरी रात में
शायर को
जीते मरते देखा है।

©® जाँगीड़ करन kk
06/04/2017___02:30AM

बुधवार, 5 अप्रैल 2017

I have endless hope

परेशानी यह नहीं कि,
जवाब नहीं
मेरे पास,
दरअसल
परेशानी इस बात की है
कि
हर बार तुम
सवाल बदल देते हो,
मैं फिर भी
हर बार
ढूंढ लेता हुँ
तुम्हारे
हर सवाल का जवाब,
बदलो,
कब तक बदलोगे....
कभी तो अंत
होगा
तुम्हारे सवालों का,
तब तुम्हें
मेरी बताये
हर जवाब का अहसास होगा...
मैं तब
तक
तुम्हारे हर सवाल का
जवाब
देता रहुँगा,
क्योंकि​
I have endless hope

©® जाँगीड़ करन kk
05/04/2017__23:00PM

मंगलवार, 4 अप्रैल 2017

शायर हरदम मुस्काते हैं

शायर उदास नहीं होते है, वो तो हरपल मुस्काते है।
शायर की डायरी तुम देखो, पन्ने उदास नजर आते है।

कल रात कोई ख्वाब टूटा नींद कहां लिखी शायर को,
चांद तो  छुपा है बादल में  शायर  की  उदास  रातें है।

सुबह  सुबह  जानें  कोई  पुकार  रहा  था  कब  से,
शायर  को  मगर भान  कहां  बैठाने  रिश्ते  नाते  है।

तुमने देखा था कल भी कैसी आँखें चमक रही थी,
आँखों  के  छाले  में  पर  रिसती  दर्द  की बातें​ है।

लम्हा लम्हा कटता कैसे कोई जाकर पूछलो उससे,
स्वर की याद में शायर के लफ़्ज कुछ बतलाते है।

©® जाँगीड़ करन kk
04/04/2017___15:00PM

सोमवार, 3 अप्रैल 2017

Alone boy 13

पर ये तारे,
हां,
देखो तो,
ऊपर आसमान में
उन दो
तारों को
अपनी जगह से
जरा सा भी नहीं हिल रहे
वो दोनों,
कुछ समझ आया,
हां,
दोनों
की नियति में
एक दुसरे से
मिलन शायद
नहीं लिखा है,
मगर दोनों कहीं
दूर भी
नहीं
जाना चाहते,
जानें क्या है
दोनों के मन में,
शायद
उन्हें अब भी
उम्मीद है
कभी वक्त उनके
ख्वाबों को
समझेगा,
पास आने की
कोई राह
मिल
सकती है कभी
न कभी......
आसमान सो
रहा है,
मगर ये दो
तारे
रातभर
जानें क्यों
जागते रहते हैं।
©® जाँगीड़ करन kk
03/04/2017__19:50PM

रविवार, 2 अप्रैल 2017

Alone boy 12

हां,
मैं देख रहा हूं,
आसमान में,
वहीं नौ तारे,
हर दिन
ये ऐसे ही
आसमान में
इसी जगह
चमकते हैं।
जानती हो ना,
बाकी सात
तारों की बजाय
दो तारे
कुछ अलग ही
मूड में
नजर आते हैं,
हर पल
कुछ तलाश करते हुए
नजर आते हैं,
जानें क्या खो
गया है इनका,
एक से जाकर
पूछता हूं,
अरे
इसका तो
चैन
नींद
स्वप्न
आत्मविश्वास
सब कुछ खो
गया है,
दुसरे से
पूछता हुँ तो
जवाब आया
क्योंकि ​उसका
सबकुछ
मेरी वजह से
खोया है तो
मैं उदास हुँ,
मैं बोला तो
वापस
लौटा​क्यों नहीं देती
उसका सबकुछ,
वो तारा
उदास स्वर में
बस यही
बोल पाया,
मेरे हाथ में नहीं है
लौटाना
मैं तो
बस
उसके साथ
उदास हो
सकता हूं........
©® जाँगिड़ करन kk
02/04/2017___21:00PM

Alone boy 20

A boy All in in alone Goes to A shop At a Fashion shop, Just for Watch out What things Are to be Sold there. But as he Look The...