बुधवार, 19 अप्रैल 2017

Alone boy 18

महफिल में
देखो तो
चारों ओर
उल्लास है,
हर चेहरे
पे आज अलग
ही रौनक है,
यहां संगीत की
स्वर
लहरी गूंज रही है,
चारों तरफ
रोशनी का सैलाब है....
मगर कोई
यहां भी
उदास है,
खुद को
तन्हा तन्हा
महसूस
करता है....
उसकी आंखें
हर वक्त
इक शख्स की
तलाश में
इधर उधर
झाँकती है,
जानती है ये
भी
कि वो
यहां
नजर नहीं
आनी है.....
मगर उस
तन्हा
दिल के
पास
और कोई
चारा भी तो नहीं......
©® जाँगीड़ करन kk
19_04_2017__22:00PM

1 टिप्पणी:

  1. खूबसुरत नजारा
    खूबसूरत कविता
    कमाल के कवि है आप ..
    लिखते रहो , बढते रहो .,

    उत्तर देंहटाएं

A letter to swar by music 34

Dear Swar, .................. बहारें तस्वीर से आयें या हकीकत से, जिंदगी तो हर हाल में खिलखिलानी है।। ........ और देखो, इधर बरसात के ब...