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Alone boy 2

#Alone_boy_2
एकांत में एक लड़का
पढ़ाई की मेज पर
हाथ में
दर्पण
लिये बैठता है।
और दर्पण में
देखता है,
सिर्फ अपने
बालों को।
ढुँढता है इनमें
एक दो
सफेद हुए बाल।
जब उखाड़ लेता है
वो बाल तो
हाथ में ले कर
गौर से
देखता है
सोचता है
काल के उस
खंड को
जिसने
सफेद किया इसको।
सोचता है उस वजह को
जिसके कारण
बाल सफेद हुए.....
जानता है वो
कि
इससे
सफेद बाल और बढ़ने है......
फिर भी,
एकांत में
सोचता है.....#एकांत_मैं_लड़का@जाँगीड़ करन

Alone boy 1

#alone_boyएकांत में
समंदर किनारे बैठकर
एक लड़का सोचता है,
जिंदगी के पिछले पन्नों को।
समंदर की लहरों के
आने जाने की
गति में ढुंढता है...
खुद को,
सपनों को,
हर लहर से
काल के एक खंड की
कल्पना करता है,
और ज्युहीं लहर
वापस जाती है तो
अपने गाल से उस
लहर के निशान को मिटाकर।
चल देता है घर,
सुना है कि वो हँसता बहुत है...
हाँ!!! अब
फिर से कोई सपना बुना है शायद...
कल फिर समंदर किनारे आना है उसे!!
#एकांत_मैं_लड़का@जाँगीड़ करन

A letter to swar by music 15

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Dear SWAR,तराना मोहब्बत का सीखने निकला हुँ,
फिर मंजिल से दूर फिसलने निकला हुँ।
होठों के मिलन से जिंदगी की मदहोशी,
कोई महफिल ऐसी सजाने निकला हुँ।।"देखो इधर साल का अंतिम सप्ताह चल रहा है और साल 2016 को मैंने अपनी जिंदगी का सबसे खराब साल पाया था, जहां साल में पूरे समय सिर्फ बेबसी दिखाई दी और कहीं कुछ टूटती आस ही दिखाई दी। मगर इस अंतिम सप्ताह में जिंदगी को कुछ नया देखने को मिला। हाँ।। हर वक्त खोया खोया रहने वाला मैं शायद तुम्हारे होठों पर छाने लगा हुँ। और मैं वर्तमान में जीने वाला इंसान हुँ आगे क्या होगा फर्क नहीं पड़ता। बस तुम्हारी चेहरे पर मुस्कान अच्छी लगी और पुराने नटखटपन वाले दिन याद आने लगे हैं। और मैं इस पल को जीना चाहता हुँ।
तुम जानती हो ना मैंने इंतजार भी किया है इस दिल के लिए, इस एक पल के लिए इतना लंबा इंतजार किया है। जबकि यह पल गुजर जाएगा थोड़ी ही देर में और फिर वापस बचेगी वहीं बेबसी और इंतजार। मगर मैं इस पल को जीना चाहता हुँ, इसे सजाना चाहता हुँ अपनी कल्पना से सजाना चाहता हुँ ताकि यह पल सदियों तक याद रखा जायें। जहां की हर जुबां पर यह पल छा जायें।
हाँ!!! तुमने ठीक सुना था …

करार

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बिन उसके उस पर एतबार कर लुँ,
बंद आंखों से उसका दीदार कर लुँ।सासों का लश्कर बोलता है जहां तो,
धड़कनों का तुझसे इकरार कर लुँ।।इक बार गर आ जायें सामने फिर वो,
हद से भी ज्यादा में उनसे प्यार कर लुँ।जानें  को जब  जब वो हो जायें आतुर,
मैं खुद को मिलनें को बेकरार कर लुँ।।कोई बात है जो दिल में चुभती है करन,
ग़ज़ल के स्वर से अब मैं करार कर लुँ।।
©® जाँगीड़ करन kk
22_12_2016___07:20 morning

इक शायर

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घर में रहकर बेघर होता है,
शायर शहर शहर होता है।सबकी वाही वाही लूटकर
अकेले  में  मगर  रोता  है।।लोग जिन्हें लफ़्ज समझते,
छालों का वो सफर होता है।आज यहाँ कल देश पराया,
जानें  कब  किधर होता  है।शांत समंदर के बैठ किनारे,
खुद  में  वो लहर  होता है।।किस कश्ती की करूँ सवारी,
कैसा  हरदम  भरम होता है।जिंदगी तो बन गई है करन,
बस होठों पर तो स्वर होता है।
©® जाँगीड़ करन kk
19_12_2016____7:30morning

आशीर्वाद

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और जैसे ही डॉक्टर ने कहा कि हम कामयाब हुए, यह सुनते ही रमेश बाबु के चेहरे पे अचानक आश्चर्य और खुशी एक साथ आ गई। खुशी तो इस बात की कि बेटा बच गया पर आश्चर्य इस बात का हो रहा था कि पिछले तीन दिन से O- खून के लिये भागादौड़ी की मगर खून नहीं मिला और अब मैं थक हार कर बैठ गया तो अचानक अब खून देने कौन आ गया। रमेश बाबु तुरंत डॉक्टर की तरफ भागे और एक ही प्रश्न किया कि खून कहाँ से आया?
डॉक्टर ने मुख्य दरवाजे की तरफ जाते हुए एक आदमी की तरफ इशारा किया और कहा 'वो लाल शर्ट वाले ने दिया'रमेश बाबु तुरंत उस आदमी की तरफ दौड़ पड़े और पीछे से पुकारा, 'रूकिये'
वो आदमी जब पीछे मुड़ा तो चेहरा देखकर रमेश बाबु के पैरों तले की जमीन खिसक गई बस मुँह से इतना ही निकला, "तुम!!!!"
'हाँ बाबुजी।।. जब परसों के अखबार में पढ़ा तो बाहर था तुरंत रवाना हो गया, आज पहुँच पाया!! पर अब आप चिंता न करें राजकुमार को कुछ नहीं होगा।।
'मैं तुम्हारे अहसान का कर्ज कैसे चुका पाऊँगा' ,रमेश बाबु बोलें।।
'अरे!! बाबुजी कैसा अहसान!!! मैं तो अपने गुरू के आशीर्वाद की लाज रखने आया हुँ। वो नहीं रहे पर उनक…

Sorry Damini

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बचालो  मुझे  वो पुकार रही हमको,
सपनें में वो आत्मा बुला रही हमको।इक बिटिया को जन्म देने वाली हुँ मैं,
कोख में मार दुँ इक माँ कह रही हमको।क्या मैं वहशी नजरों के लिये बनी हुँ,
हर बिटिया चीखकर बता रही हमको।बहुत स्नेह की जरूरत है उसको तो,
दर्द के मारे ही वो सता रही हमको।दामन में हमारे कितने दाग है करन,
दामिनी हर पल धिक्कार रही हमको।
©® जाँगीड़ करन kk
16_12_2016___7:30morning

लिख रहा हुँ

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मैं उस दर पे बंदगी लिख रहा हुँ,
छोड़ भरम सारे सादगी लिख रहा हुँ।जहाँ रास्ते बदल जाते है सफर में,
मोड़ की मैं बदनसीबी लिख रहा हुँ।जुगनुँ की रोशनाई से परे है जो,
चाँद की वो चाँदनी लिख रहा हुँ।रिश्तों की अहमियत कब समझोगे,
दिल की मैं तिशनगी लिख रहा हुँ।हर  हर्फ की अपनी  ही कहानी है,
मैं एक शेर में जिंदगी लिख रहा हुँ।एक स्वर पर न्यौछावर है करन तो,
मैं  गीत  से  दीवानगी लिख रहा हुँ।।
©® जाँगीड़ करन kk
14_12_2016___07:20morning

काजल

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मोहब्बत के दिन याद आने लगे है।
वो फिर से सज सँवर जाने लगे है।।जब से कदम रखा है उन्होनें बाग में,
पतझड़ में भी फूल खिल जाने लगे है।जब जिंदगी की तप रही ऊलझनों में,
अपनी जुल्फों से घटा बरसाने लगे है।कैसे  रोकुँ  हुस्न से खुद को बचाने,
हर रोज मुझे अब आजमाने लगे है।भला कोई अब कैसे बच पाये करन,
काजल  से  वो  कत्ल कराने लगे है।
©® जाँगीड़ करन kk
10_12_2016___6:00morning

ऊजाले का स्वर

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अंधियारी रात के बाद,
तारों की बारात के बाद,
उजाले ने
पैर अपने
पसारे है
तुमने
घुँघट जरा
हटाया है शायद.....किसी छोर से,
कहीं ओर से,
आवाज आती है,
खनक की,
कि पनघट पर,
तुमने
कदम अपने
रख दिये है शायद......कहीं दूर से,
उस सदूर से,
हवाएँ,
लेकर आई है,
खुशबु की सौगात,
कहीं तुम में,
जुल्फें अपनी
बिखेर दी है शायद......किसी पेड़ पर,
या खेत की मेड़ पर,
चिड़िया भी
चहकी है अब,
तुमने स्वर
अपना
उनको
सुना दिया है शायद.......©® जाँगीड़ करन kk
06/12/2016___6:30AMफोटो साभार इंटरनेट

मदहोश दिल

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तेरी जुल्फों से खेलों कि खुद पे बारिश कर दुँ,
तेरे दामन में सो जाऊँ खुद को गुलाब कर दुँ।तेरे होठों के प्याले से जब जाम छलकता हो,
मैं क्यों खुद की राह मयखाने की ओर कर दुँ।तेरे चेहरे की ही रंगत है या चाँद की परछाई है,
मैं इसे निहारते हुए न्यौछावर सारी रात कर दुँ।गुलाब खुद तुमसे अपना नूर माँगने आता है जब,
मैं अपनी नजरों का रूख कहीं और कैसे कर दुँ।जो तुम अपनी पायल का स्वर सुना दो मुझको,
मैं खो के धुन इसकी खुद को मदहोश कर दुँ।।
©® जाँगीड़ करन kk
03/12/2016__20:00pm

अरदास

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कोई चलता है मोहब्बत की प्यास लिये,
कोई छलता है जिंदगी की आस लिये।हर पल नजरें दरवाजे पे ही टिकी हुई,
पलकें झपकती है तेरा ही आभास लिये।अंधेरी रातों में वीराने का तुम्हें डर कैसा,
बेधड़क चलो संग जुगनु का प्रकाश लिये।कोई मुस्कुराने की वजह तो ढूँढ लें तु भी,
क्यों हर वक्त रहता है चेहरा उदास लिये।हे जगदाता विश्वविधाता सुन ले तु मेरी भी,
आया करन अब द्वार पे तेरे अरदास लिये।।
©® जाँगीड़ करन KK
01-12-2016__07:30 morning