Thursday, 1 December 2016

अरदास

कोई चलता है मोहब्बत की प्यास लिये,
कोई छलता है जिंदगी की आस लिये।

हर पल नजरें दरवाजे पे ही टिकी हुई,
पलकें झपकती है तेरा ही आभास लिये।

अंधेरी रातों में वीराने का तुम्हें डर कैसा,
बेधड़क चलो संग जुगनु का प्रकाश लिये।

कोई मुस्कुराने की वजह तो ढूँढ लें तु भी,
क्यों हर वक्त रहता है चेहरा उदास लिये।

हे जगदाता विश्वविधाता सुन ले तु मेरी भी,
आया करन अब द्वार पे तेरे अरदास लिये।।
©® जाँगीड़ करन KK
01-12-2016__07:30 morning

3 comments:

  1. वाह सर क्या बात है
    लाज़वाब

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    Replies
    1. बहुत बहुत शुक्रिया

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  2. शानदार. .
    गज़ब

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