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Alone boy 2

#Alone_boy_2
एकांत में एक लड़का
पढ़ाई की मेज पर
हाथ में
दर्पण
लिये बैठता है।
और दर्पण में
देखता है,
सिर्फ अपने
बालों को।
ढुँढता है इनमें
एक दो
सफेद हुए बाल।
जब उखाड़ लेता है
वो बाल तो
हाथ में ले कर
गौर से
देखता है
सोचता है
काल के उस
खंड को
जिसने
सफेद किया इसको।
सोचता है उस वजह को
जिसके कारण
बाल सफेद हुए.....
जानता है वो
कि
इससे
सफेद बाल और बढ़ने है......
फिर भी,
एकांत में
सोचता है.....#एकांत_मैं_लड़का@जाँगीड़ करन

Alone boy 1

#alone_boyएकांत में
समंदर किनारे बैठकर
एक लड़का सोचता है,
जिंदगी के पिछले पन्नों को।
समंदर की लहरों के
आने जाने की
गति में ढुंढता है...
खुद को,
सपनों को,
हर लहर से
काल के एक खंड की
कल्पना करता है,
और ज्युहीं लहर
वापस जाती है तो
अपने गाल से उस
लहर के निशान को मिटाकर।
चल देता है घर,
सुना है कि वो हँसता बहुत है...
हाँ!!! अब
फिर से कोई सपना बुना है शायद...
कल फिर समंदर किनारे आना है उसे!!
#एकांत_मैं_लड़का@जाँगीड़ करन

A letter to swar by music 15

चित्र
Dear SWAR,तराना मोहब्बत का सीखने निकला हुँ,
फिर मंजिल से दूर फिसलने निकला हुँ।
होठों के मिलन से जिंदगी की मदहोशी,
कोई महफिल ऐसी सजाने निकला हुँ।।"देखो इधर साल का अंतिम सप्ताह चल रहा है और साल 2016 को मैंने अपनी जिंदगी का सबसे खराब साल पाया था, जहां साल में पूरे समय सिर्फ बेबसी दिखाई दी और कहीं कुछ टूटती आस ही दिखाई दी। मगर इस अंतिम सप्ताह में जिंदगी को कुछ नया देखने को मिला। हाँ।। हर वक्त खोया खोया रहने वाला मैं शायद तुम्हारे होठों पर छाने लगा हुँ। और मैं वर्तमान में जीने वाला इंसान हुँ आगे क्या होगा फर्क नहीं पड़ता। बस तुम्हारी चेहरे पर मुस्कान अच्छी लगी और पुराने नटखटपन वाले दिन याद आने लगे हैं। और मैं इस पल को जीना चाहता हुँ।
तुम जानती हो ना मैंने इंतजार भी किया है इस दिल के लिए, इस एक पल के लिए इतना लंबा इंतजार किया है। जबकि यह पल गुजर जाएगा थोड़ी ही देर में और फिर वापस बचेगी वहीं बेबसी और इंतजार। मगर मैं इस पल को जीना चाहता हुँ, इसे सजाना चाहता हुँ अपनी कल्पना से सजाना चाहता हुँ ताकि यह पल सदियों तक याद रखा जायें। जहां की हर जुबां पर यह पल छा जायें।
हाँ!!! तुमने ठीक सुना था …

करार

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बिन उसके उस पर एतबार कर लुँ,
बंद आंखों से उसका दीदार कर लुँ।सासों का लश्कर बोलता है जहां तो,
धड़कनों का तुझसे इकरार कर लुँ।।इक बार गर आ जायें सामने फिर वो,
हद से भी ज्यादा में उनसे प्यार कर लुँ।जानें  को जब  जब वो हो जायें आतुर,
मैं खुद को मिलनें को बेकरार कर लुँ।।कोई बात है जो दिल में चुभती है करन,
ग़ज़ल के स्वर से अब मैं करार कर लुँ।।
©® जाँगीड़ करन kk
22_12_2016___07:20 morning

इक शायर

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घर में रहकर बेघर होता है,
शायर शहर शहर होता है।सबकी वाही वाही लूटकर
अकेले  में  मगर  रोता  है।।लोग जिन्हें लफ़्ज समझते,
छालों का वो सफर होता है।आज यहाँ कल देश पराया,
जानें  कब  किधर होता  है।शांत समंदर के बैठ किनारे,
खुद  में  वो लहर  होता है।।किस कश्ती की करूँ सवारी,
कैसा  हरदम  भरम होता है।जिंदगी तो बन गई है करन,
बस होठों पर तो स्वर होता है।
©® जाँगीड़ करन kk
19_12_2016____7:30morning

आशीर्वाद

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और जैसे ही डॉक्टर ने कहा कि हम कामयाब हुए, यह सुनते ही रमेश बाबु के चेहरे पे अचानक आश्चर्य और खुशी एक साथ आ गई। खुशी तो इस बात की कि बेटा बच गया पर आश्चर्य इस बात का हो रहा था कि पिछले तीन दिन से O- खून के लिये भागादौड़ी की मगर खून नहीं मिला और अब मैं थक हार कर बैठ गया तो अचानक अब खून देने कौन आ गया। रमेश बाबु तुरंत डॉक्टर की तरफ भागे और एक ही प्रश्न किया कि खून कहाँ से आया?
डॉक्टर ने मुख्य दरवाजे की तरफ जाते हुए एक आदमी की तरफ इशारा किया और कहा 'वो लाल शर्ट वाले ने दिया'रमेश बाबु तुरंत उस आदमी की तरफ दौड़ पड़े और पीछे से पुकारा, 'रूकिये'
वो आदमी जब पीछे मुड़ा तो चेहरा देखकर रमेश बाबु के पैरों तले की जमीन खिसक गई बस मुँह से इतना ही निकला, "तुम!!!!"
'हाँ बाबुजी।।. जब परसों के अखबार में पढ़ा तो बाहर था तुरंत रवाना हो गया, आज पहुँच पाया!! पर अब आप चिंता न करें राजकुमार को कुछ नहीं होगा।।
'मैं तुम्हारे अहसान का कर्ज कैसे चुका पाऊँगा' ,रमेश बाबु बोलें।।
'अरे!! बाबुजी कैसा अहसान!!! मैं तो अपने गुरू के आशीर्वाद की लाज रखने आया हुँ। वो नहीं रहे पर उनक…

Sorry Damini

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बचालो  मुझे  वो पुकार रही हमको,
सपनें में वो आत्मा बुला रही हमको।इक बिटिया को जन्म देने वाली हुँ मैं,
कोख में मार दुँ इक माँ कह रही हमको।क्या मैं वहशी नजरों के लिये बनी हुँ,
हर बिटिया चीखकर बता रही हमको।बहुत स्नेह की जरूरत है उसको तो,
दर्द के मारे ही वो सता रही हमको।दामन में हमारे कितने दाग है करन,
दामिनी हर पल धिक्कार रही हमको।
©® जाँगीड़ करन kk
16_12_2016___7:30morning

लिख रहा हुँ

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मैं उस दर पे बंदगी लिख रहा हुँ,
छोड़ भरम सारे सादगी लिख रहा हुँ।जहाँ रास्ते बदल जाते है सफर में,
मोड़ की मैं बदनसीबी लिख रहा हुँ।जुगनुँ की रोशनाई से परे है जो,
चाँद की वो चाँदनी लिख रहा हुँ।रिश्तों की अहमियत कब समझोगे,
दिल की मैं तिशनगी लिख रहा हुँ।हर  हर्फ की अपनी  ही कहानी है,
मैं एक शेर में जिंदगी लिख रहा हुँ।एक स्वर पर न्यौछावर है करन तो,
मैं  गीत  से  दीवानगी लिख रहा हुँ।।
©® जाँगीड़ करन kk
14_12_2016___07:20morning

काजल

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मोहब्बत के दिन याद आने लगे है।
वो फिर से सज सँवर जाने लगे है।।जब से कदम रखा है उन्होनें बाग में,
पतझड़ में भी फूल खिल जाने लगे है।जब जिंदगी की तप रही ऊलझनों में,
अपनी जुल्फों से घटा बरसाने लगे है।कैसे  रोकुँ  हुस्न से खुद को बचाने,
हर रोज मुझे अब आजमाने लगे है।भला कोई अब कैसे बच पाये करन,
काजल  से  वो  कत्ल कराने लगे है।
©® जाँगीड़ करन kk
10_12_2016___6:00morning

ऊजाले का स्वर

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अंधियारी रात के बाद,
तारों की बारात के बाद,
उजाले ने
पैर अपने
पसारे है
तुमने
घुँघट जरा
हटाया है शायद.....किसी छोर से,
कहीं ओर से,
आवाज आती है,
खनक की,
कि पनघट पर,
तुमने
कदम अपने
रख दिये है शायद......कहीं दूर से,
उस सदूर से,
हवाएँ,
लेकर आई है,
खुशबु की सौगात,
कहीं तुम में,
जुल्फें अपनी
बिखेर दी है शायद......किसी पेड़ पर,
या खेत की मेड़ पर,
चिड़िया भी
चहकी है अब,
तुमने स्वर
अपना
उनको
सुना दिया है शायद.......©® जाँगीड़ करन kk
06/12/2016___6:30AMफोटो साभार इंटरनेट

मदहोश दिल

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तेरी जुल्फों से खेलों कि खुद पे बारिश कर दुँ,
तेरे दामन में सो जाऊँ खुद को गुलाब कर दुँ।तेरे होठों के प्याले से जब जाम छलकता हो,
मैं क्यों खुद की राह मयखाने की ओर कर दुँ।तेरे चेहरे की ही रंगत है या चाँद की परछाई है,
मैं इसे निहारते हुए न्यौछावर सारी रात कर दुँ।गुलाब खुद तुमसे अपना नूर माँगने आता है जब,
मैं अपनी नजरों का रूख कहीं और कैसे कर दुँ।जो तुम अपनी पायल का स्वर सुना दो मुझको,
मैं खो के धुन इसकी खुद को मदहोश कर दुँ।।
©® जाँगीड़ करन kk
03/12/2016__20:00pm

अरदास

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कोई चलता है मोहब्बत की प्यास लिये,
कोई छलता है जिंदगी की आस लिये।हर पल नजरें दरवाजे पे ही टिकी हुई,
पलकें झपकती है तेरा ही आभास लिये।अंधेरी रातों में वीराने का तुम्हें डर कैसा,
बेधड़क चलो संग जुगनु का प्रकाश लिये।कोई मुस्कुराने की वजह तो ढूँढ लें तु भी,
क्यों हर वक्त रहता है चेहरा उदास लिये।हे जगदाता विश्वविधाता सुन ले तु मेरी भी,
आया करन अब द्वार पे तेरे अरदास लिये।।
©® जाँगीड़ करन KK
01-12-2016__07:30 morning

A letter to swar by music 14

चित्र
Dear SWAR,
कल्पना, तुमने भी काफी सुना होगा इसके बारे में। हाँ, वहीं कल्पना जो उस परमात्मा ने करके ही यह संसार बनाया था। इस संसार में जीव जंतु, पक्षी, नर, सूरज, चाँद, तारे, धरती, समंदर, झील, नदी, नालें, जंगल सब उसकी कल्पना का ही साकार रूप है। और इन सबकी अपनी अलग अलग पहचान है, रूप है, रंग है, कला है यह सब भी उसकी अपनी कल्पना का काम है......
और इस काल्पनिक सत्यता के बीच उसने जब तुम्हें बनाने की कल्पना की तो उस समय उसे शायद चाँद की याद तस्वीर दिमाग में थी, और तुम्हारा चेहरा जो उसने चाँद सा ही बना दिया तो
और जब उसने तुम्हें चाँद सा बना ही दिया तो मेरी कल्पनाओं का भी अपना स्थान बनता है ना!! और तुम्हारे चेहरे पे चमकती हुई बिंदी जैसे कि चाँद का पास में शुक्र ग्रह चमका रहा हो, बस जी करता है कि तुम्हें इस रूप में युँ ही देखता रहुँ.......
और सुनो!! जब वो बादलों की कल्पना करके तुम्हारे केशों का घने काले और बहुत लंबे (हाँ!!! दुसरे भी कहते है यह तो मुझसे) बना सकता है, तो क्यों न मैं मेरी कल्पनाओं का गजरा इनमें लगाऊँ, जब तुम प्रेम की बारिश करो अपनी जुल्फों से तो, मैं भीनी भीनी खुशबु में खो जाऊँ, कि…

हो जा सयाना

चित्र
बेतरतीब  जिंदगी का फ़साना है,
कुछ तुम्हें कुछ मुझे आजमाना है।लाख दिलों को घायल कर दें,
गौरी  का  कैसा शरमाना  है।वक्त के बेरहम हाथों से सब को,
इक  बार तो गुजर के जाना है।कितनी  पीर  को सहता है दिल,
इस  बात  से जग अनजाना है।मात पिता इक सच्चे साथी,
मेरा तो बस यहीं बताना है।।चल करन अब छोड़ दें आशा,
हो  गया  अब  तो सयाना है।
©®जाँगीड़ करन kk
26-11-2016__11:30AM

थकान

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मैं जेठ की
तपती दोपहरी में भी
एक बूँद की आस में
घूरता हुँ आसमान.....
हर दौर में यहीं हुआ
मोहब्बत के दुश्मनों
से तंग आकर
हार गये सब अरमान....तुम युँ चिंता न करो
अपने पर ही अड़े रहो
दिखता है आँखों में तुम्हारी
मुझे वो चढ़ता परवान....रातें बात बहुत करती है
मगर तन्हाई ही लगती है
बंद आँखों से तब
करता हुँ मैं तेरा ध्यान...
अहसासों की परवाह
कब तुमने की है
बस नफरत का ही
करते हो संधान...वक्त की हर चाल से
मात खा रहा हुँ मैं
हारना मगर फितरत नहीं
बस हुँ मैं हैरान....मुझे मालुम है कि
मैं भटका हुआ राही हुँ
मगर मैं कर्ण हुँ
नहीं है मेरे पैरों में थकान।
©® जाँगीड़ करन kk
23_11_2016-- 11:00 pm

A letter to swar by music 13

चित्र
Hello dear SWAR.....
..................,.................
बहुत हँसी आ रही है, पेट दर्द करने लग गया है हँसते हँसते। बात ही तुम ऐसी करती हो ना....
क्या कहा तुमने तुम्हारी बकरियों ने....... खैर छोड़ो..
पर पढ़कर मजा आ गया!!!!!
और तुम्हें मालुम है न मैं हँसता नहीं मगर जब हँसता हुँ तो लोग मुझे देखकर ही हँसते है कि छोरा बावळा हो गया।।
पर एक बात तो कहुँगा तुम लापरवाह बहुत हो, इतनी बड़ी लापरवाही!!! हद है यार, फिर कहती हो, डाँटा मत करो ।। नहीं डाँटु तो क्या करूँ? मगर मैं जानता हुँ इस डाँट में भी प्यार ढुँढना तुम्हें आता है, इसलिये तो तुम्हारी लापरवाही कभी कम नहीं होती।
और हाँ सुनो!!!
तुमने अबके खत के साथ जो पहाड़ी वाला फोटो भेजा है वाकई में खूबसुरत था, सूरज से नजरें मिलाती तुम कितनी अच्छी लगती हो, और तुम्हारे चेहरे पर अस्त होते सूरज की लाल किरणें पड़ती है तो वाकई कमाल!! जी करता है अभी....................
और सुनो पार्टनर!!! अब ठंड बढ़ रही है उस दरिया का पानी अब ठंडा रहेगा, उसमें उतरने की कोशिश मत करना, बिल्कुल भी नहीं।। पता है ना तुम्हें जुकाम कितना जल्दी हो जाता है।।
..........................

ऊलझन

चित्र
इक छन से
              इक मन की
      बढ़ी ऊलझन।।
इक घन से
             इक तन की
        बढी तड़पन।।
इक तन की
              इक तन तब
         बनी करधन
इक फन से
             इक धन की
        बढ़ी विचलन।।
इक तन से
             इक तन की
        बढ़ी धड़कन।।
©®जाँगीड़ करन kk

जीत से हार की ओर

चित्र
जीत की दहलीज से मैं लौट आया हार को,
शुकुन  तो मिला  होगा अब सारे संसार को।मन में अपने ही कितना द्वेष लिये चलते है,
क्यों युहीं दोष देते है भाई घर की दीवार को।सुई लेकर सील लो उधड़े रिश्तों को अब तुम,
यह काम की नहीं दूर फेंको इस तलवार को।तुम न जानें क्यों कुछ सुनातें नहीं आजकल,
कान मेरे तरस रहे 'स्वर' सुनने तेरी झंकार को।समंदर में तो तुफानों से सामना होना है 'करन',
मैं  मजबूत कर चुका हुँ नाव  की पतवार को।
©®जाँगीड़ करन kk
18-11-2016__06:45AM

जिंदगी तेरा इरादा क्या है?

चित्र
गिरती हुई आस को
उलझी जुल्फों का
सहारा!!
जिंदगी
तेरा इरादा क्या है?डुबती हुई नाव को
गुलाबी हौठों का
किनारा!!
जिंदगी
यह फसाना क्या है?प्यास की चरम सीमा पे
छलकती आँख का
इशारा!
जिंदगी
यह दास्तान क्या है?रूठी हुई किस्मत को
हँसी चेहरे का
नजारा!!
जिंदगी
यह सताना क्या है?बहरे से करन को
किसी स्वर ने
पुकारा!!
जिंदगी
यह तराना क्या है?
©® जाँगीड़ करन kkPhoto via Google with due thanks

हे ईश

चित्र
रूई की फोहों से चोटिल
सर को
इक पत्थर ने सहलाया तो.....गुलाबी फूल से घायल
पैर को
काँटों ने सँभाला तो.......मुस्काते चेहरे में पीड़ित
आँखों को
इक दर्द ने हँसाया तो.....इक मौन से बैकल
मन को
इक गुँगे ने पुकारा तो.......कैसे भूलुँ ईश तेरी
कृपा को
हार से तुमने जीताया तो.......
©® जाँगीड़ करन KK

चाँद का टुकड़ा

चित्र
हाँ!! मैं अब भी मेरी छत पर बैठा उस खिड़की को निहार रहा हुँ, कि शायद किस पल तुम उससे झाँकने का इरादा कर लो! वैसे देखो ऊपर आसमाँ में चाँद भी अपने पुरे शबाब पर है, और तुम भी तो........ उस समय युँ चौदहवीं चाँद सी नजर आती थी, उस खिड़की से झाँकती हुई, और मैं अपनी सुधबुध खोयें सिर्फ तुम्हें देखता था, एकटक।
हाँ।। मुझे वो दिन अब भी याद है जब मैं गली में खेलता तो तुम ऊपर से झाँकती, पता होता मुझे कि तुम देख रही हो, मगर मैं उस तरफ नहीं देखता था, नहीं नहीं!!! मुझे खुद के विश्वामित्र होने का घमंड नहीं था, मैं तो बस इसलिये ऊपर नहीं देखता था क्योंकि अगर एक बार हमारी नजरें मिल जाती तो तुम वहाँ से फिर चली जाती थी, यह मुझे अच्छा नहीं लगता था, मैं चाहता था कि तुम वहीं खिड़की पे खड़ी रहो इसलिये मैं बस तुम्हें न देखकर केवल तुम्हें सोच लेता था, जैसा कि अब भी सोच रहा हुँ!!
पता है मुझे मैं जब भी अच्छा खेलता तो तुम अपनी आँख को हल्के से बंद करके ऐसे इशारा करती कि जैसे यह मेरी नहीं तुम्हारी जीत हो, हाँ... मुझे मालुम है.... मेरी हार तुम्हें बर्दाश्त नहीं थी ना, मैं जब भी हारता तो तुम नाक सिकोड़ती और कभी कभी तो म…

स्वर की थिरकन

चित्र
महसूस  जो कर  लें मुझको तुमने धड़कन देखी है,
जिसकी धुन को कान सुन रहे ऐसी करधन देखी है।और  जमाने के  रिश्तों की बात नहीं मालूम मुझे,
जमीं की खातिर भाई की भाई से अनबन देखी है।किसने  बोला फुलों से घायल  नहीं होते है भँवरे,
जब से तुम से आँख मिलाई पीर ही नैनन देखी है।हाथ बढ़ाया जब भी मैनें तुमसे हाथ मिलाने को,
लोगों की आँखों में मैनें तब तब अड़चन देखी है।।जब भी मेरी आँखों ने कोई ख्वाब नया दिखलाया है,
एक बावले करन ने तो स्वर की थिरकन देखी है।।
©®जाँगीड़ करन kk
07/11/2016_5:00AMफोटो- साभार गुगल

तुम याद रख लेना

चित्र
मेरी  आँखों में  झाँकने का हुनर रख लेना,
समंदर  सुखा है ये  इतनी समझ रख लेना।जीत का सेहरा बाँधने का शौक नहीं मुझको,
मेरी हार  तक का मंजर तुम याद रख लेना।।बिछुड़े आज फिर कहीं मुलाकात हो शायद,
मेरी पहचान को  आँखों में बसाये रख लेना।कहीं मिल जायें जो मेरे बिखरे हुए सपने तो,
उन  सपनों को दिल  में समेटकर रख लेना।कौन  कहता है  कि मौत से डरता है करन,
बस  तब मेरा  सर अपनी गौद में रख लेना।
©®जाँगीड़ करन kk
©® 05/11/2016__5:00AM

बहुत खूब सोची है।

सियासती लोग कब देश की सोची है।
अपनी जीत की बस तरकीब सोची है।हमेशा अपने ही घर भरते रहे हो तुम,
कब  गरीबों के हालात की  सोची है।मुश्किलें उस राह की तुम क्या जानो,
कब तुमने चाँद तक जाने की सोची है।मैं वक्त से आँख मिलाकर चल पड़ा हुँ,
मैनें कर्म को अपनी तकदीर सोची है।तु हकीकत में कहीं और का मुसाफिर है,
मैनें पर संग मेरे तेरी ही तस्वीर सोची है।मैं अपनी ही मौज का दीवाना हुँ करन,
कब मैनें जमाने से बगावत की सोची है।
©® जाँगीड़ करन kk
04/11/2016__20:00PM

जुल्फों के फंदे

चित्र
जुल्फों के इन फंदों में फँसकर,
जिंदगी नहीं चलती संभलकर।आईना भी तुमसे कहता होगा,
जान लेगी मुँह उस तरफ कर।साँझ ढले पनघट पर न जाना,
राही गिरते पड़ते संभलकर।आसमान तो है काला काला,
पुर्णिमा कर दें चल छत पर।एक करन अब कितना बोलें,
चल सोजा ख्वाब संजोकर।।
©® जाँगीड़ करन kk

बचपन का सावन

चित्र
यादों के उस समंदर से भरके नाव लाया हुँ,
जवानी के शहर में बचपन का गाँव लाया हुँ।झाड़ियों में छिपे खरगोश की आहट,
कच्चे  आमों की  वो  खट्टी  बोराहट।
खेत मालिक के आने की ले सूचना,
मैं सरपट दौड़ के उल्टे पाँव आया हुँ...
जवानी के शहर.........................दीपावली  के दिये  से  बनाये तराजु,
बोलो  सेठ  क्या  भाव लगाये काजु।
तकड़ी  के धागों  में हौले  से बसता,
भ्रातृत्व  स्नेह वो  का भाव  लाया हुँ।
जवानी के शहर....................तितलियों  के  पीछे भागती  हुई बहना,
फूलों की क्यारियों का भी क्या कहना।
बहना की आँखों में बसा  सुंदर संसार,
देखो तो जरा कहाँ से संभाल लाया हुँ।
जवानी के शहर.......................गलियों  में यह  क्या हो रही है हलचल,
कोई कान में फुसफुसाया चुपके से चल।
शहर के इन सन्नाटों को तोड़ने के लिये,
बचपन के खेल से मेरा वो डाम लाया हुँ।
जवानी के शहर..........................सुबह से शाम तक दर्द ही तो सहता हुँ,
तुम नहीं समझोगे मैं गुमसुम रहता हुँ।
क्यों  लौटकर  नहीं आ जाता बचपन,
जिंदगी तेरे लिये एक सवाल लाया हुँ।।
जवानी के शहर.........................
©®जाँगीड़ करन KK
02/11/2016__…

यह मेरी दिवाली

चित्र
काली घटा है या लहराई जुल्फें उनकी,
यह इंद्रधनुष है या उठी पलकें उनकी।मेरे घर के बर्तन भी नाचने लगे है सब,
यह कैसी मदमस्त सी चाल है उनकी।सारा शहर रोशन हुआ है दिवाली पर,
जब रात को सूरत सबने देखी उनकी।फुलझड़ियाँ पटाखें सब धरे रह गये,
एक हँसी जब आई अधरों पे उनकी।मेरे ख्वाबों में वो पायल खनकाते है,
मेरी नींद से है शायद दुश्मनी उनकी।सीमाओं पर जो डँटे ही रहे है करन,
यह दीवाली कर दुँ मैं तो नाम उनकी।
©® जाँगीड़ करन kk
30/10/2016__6:00AM
फोटो- साभार इंटरनेट

धूल और जल

चित्र
मैं धरा की धूल विचलित सी
कहीं उड़ती फिरूँ,
बेखबर सी,
बेबस सी,
मैं चुभ रही
कितनी आँखों को।
बस तुम्हारी मोहब्बत की
बारिश का
इंतजार करूँ।
तुम बनके जल
बरस जाओ,
मैं जमीं पर
जम जाऊँ।
तुम बहना नदी में,
मैं संग तेरे सरका करूँ,
पहुँच जाऊँ मैं जब
समंदर में
कोई डर नहीं
फिर
तुम्हारे बिछुड़ने का
सदा के लिये
तुम वहाँ रहोगे
है ना....
ओ जल मेरे!!
मैं धरा की धूल,
तेरा इंतजार करूँ।
©® जाँगीड़ करन kk
29/10/2016//...7:00AM

ख्वाहिशें

चित्र
कहीं शौर से  जिंदगी  चलती है।
कहीं मौन अभिलाषा मचलती है। आदमी आदमी से ही खफा है यहाँ,
कहते सब यह जमाने की गलती है। दूर से देख चिंगारी आतिशबाजी की,
गरीब की आँखों में दीवाली जलती है। तुम जब से रूख्सत हुए हो शहर से,
हर इक शाम तब से उदास ढलती है। तुम्हें क्या मालुम उदासी क्या है करन,
हर रात में नींद मुझे हर पल छलती है।
©® जाँगीड़ करन kk
27/10/2016_5:00AM
फोटो- साभार गुगल

A letter to swar by music 12

चित्र
Dear SWAR,
First of all happy Diwali....
.........
हाँ तो तुम्हारे पिछले खत में तुमने सिर्फ एक खाली कागज भेज दिया था, शायद थोड़ी खफा हो या तुमने खत लिखा तो है मगर हड़बड़ी में कहीं वो रह गया हो और खाली कागज भेज दिया हो...... हो सकता है क्योंकि आजकल दीपावली की सफाई चल रही है और घर के सब सामान इधर ऊधर रखे जा रहे हो तो तुमने भी शायद भूल से कहीं रख दिया हो... तुम कितनी भूलक्कड़ हो यह तो मैं जानता हुँ। एक बार तुमने भूल से खत की जगह अपने घर का बिजली का बिल भी तो भेज दिया था... खैर ये छोड़ो.. मैं खाली पन्ने से भी तुम्हें पढ़ सकता हुँ.. तुमने कितने सलीके से इसे समेटा है.. पन्ने के ऊपर तुम्हें हाथ की रेखाओं के निशाँ.... पन्ने को समेटने का अंदाज...और पन्ने से आती एक दिलकश खुशबु..... काफी है मेरे समझने के लिये कि मोहब्बत तो तुम अब भी करती हो.... वो भी बेइंतहा...
.....
खैर... सुनो!! हम भी यहाँ दीपावली की सफाई में जुटे है.. दो तीन दिन से... कहते है कि साफ सफाई अच्छी हो तो लक्ष्मी जी जल्दी आयेंगे.. पर मुझे तुम(सरस्वती पुत्री) चाहिये... और तुम भी वैसे हमें खुश देखकर और साफ सफाई देखकर ही तो आओगी ना..…