शुक्रवार, 21 अक्तूबर 2016

तीसरा चाँद

रोहित 35 वर्षीय प्रोढ़ घर में बिल्कुल अकेला रहता था। मुंबई मेट्रो सिटी में एक ऑफिस का वाईस मैनेजर था रोहित। काम का बोझ और ऊपर से अकेलापन वह उसे थका देता था।वैसे वह बहुत मजबूत इंसान था। ऑफिस से कभी व्यक्तिगत छुट्टी नहीं लेता था क्योंकि वह ज्यादा लोगों से संपर्क नहीं रखता बस घर से ऑफिस और ऑफिस से घर भी उसका था वह कभी किसी से मिलता जुलता नहीं था। लेकिन उस दिन रोहित को ऑफिस जाना शायद अच्छा न लग रहा था तो छुट्टी लेकर घर रूक गया। वो करवा चौथ का दिन था।  आज रोहित खुद को बहुत थका थका महसूस कर रहा था। सुबह का नाश्ता करके थोड़ी देर गार्डन में जा बैठा और चिड़ियों के कलरव को सुनने लगा रोज तो समय ही नहीं मिलता था गार्डन में जाने का इसलिये आज उसे यहाँ आकर बहुत सुकुन मिला। जिंदगी की उस भाग दौड़ से दूर यहाँ वो शांति से बैठा था। फिर कुछ देर बाद वो घर गया और टीवी ऑन कर दी।। टीवी पर समाचारों में करवा चौथ पर एक खास रिपोर्ट आ रही थी। इस फास्ट जमाने में त्यौहार के पारंपरिक तौर तरीकों पर चर्चा की जा रही थी। और यह सब देख कर रोहित रोहित भी जीवन के पंद्रह वर्ष पीछे की यादों में खो गया।......
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कॉलेज की b.com प्रथम वर्ष की क्लास में वो सबसे होशियार छात्र था, यहाँ तक की लेक्चरर भी उसकी बुद्धिमता और प्रतिभा से हैरान थे, हर सवाल का जवाब जैसे ऊँगलियों पर था उसके। उसी की क्लास में एक लड़की पढ़ती थी रवीना।। आवाज की मल्लिका।। कॉलेज की स्वागत  सेरेमनी में ही उसकी आवाज ने सब पर जादु कर दिया। वो कॉमर्स की पढ़ाई के साथ साथ संगीत सीखती थी इसलिये पहले दिन ही स्टेज से एक गीत सुनाया। कॉलेज का हर लड़का उससे दोस्ती करना चाहता था। पर क्योंकि रवीना अमीर घर की लड़की थी और रोज सुबह नौकर कार से छोड़ने आता और शाम को छुट्टी से पहले बाहर गाड़ी तैयार रहती इसलिये वो किसी से ज्यादा मिलती जुलती नहीं। फिर क्लास में जब उसने रोहित की प्रतिभा देखी तो हैरान रह गई। क्योंकि रवीना पढ़ाई में औसत थी तो उसने रोहित से हेल्प लेनी शुरू कर दी। और उनमें दोस्ती हो गई। अब वो अक्सर कॉलेज केंटिन में साथ साथ चाय पीते मिल जाते थे। बस वहाँ बातें सिर्फ पढ़ाई पर या संगीत पर होती थी। फिर एक दिन रवीना ने कहाँ कि रोहित तुम्हारे नंबर तो दो ताकि मैं जरूरत पड़ने पर सवाल पूछ सकुँ!!
रोहित ने कहा कि रोज तो मिलते है यहीं पूछ लेना। पर रवीना न मानी और नंबर ले लिये!! समय युहीं निकल रहा था और परीक्षा नजदीक आ गई।। रोहित अब और भी ज्यादा गहनता से मेहनत करने लगा। अब कॉलेज नहीं लगता था सब घर पे ही पढ़ते थे। रवीना भी अक्सर हेल्प के बहाने रोहित से फोन पर बात करती थी क्योंकि उसे रोहित के बिना कुछ अच्छा नहीं लगता था,
फिर वैलेंटाइन डे की सुबह रोहित के पास रवीना का मैसेज आया, "मैं तुम्हारे कमरे पर आ रही हुँ ,तुमसे मिलना है" एक बार तो रोहित को आश्चर्य हुआ पर अगले ही पल वो संभल गया और रिप्लाई दिया, "रवीना!! पढ़ाई नहीं कर रही हो?"
और फिर तो फोन की घंटी बजी नंबर रवीना के थे, रोहित ने कॉल अटेंड किया तो सामने से आवाज आई, " बुद्धु पढ़ाई तो करनी ही है, और सुनो मैं तुमसे मिलने आ रही हुँ, पापा को बोल दिया है कि कुछ सवाल समझने है"
रोहित कुछ समझ नहीं पा रहा था बस इतना सा बोला, "आ जाना"
और वो भी बैचेन अब पढ़ाई से मूड हट गया था कोई घंटे भर बाद एक गाड़ी उसके कमरे के बाहर आकर रूकी। उसकी धड़कन बढ़ गई थी। उसने कमरा खोला तो बाहर रवीना गाड़ी से उतर रही थी और आज खुद ही गाड़ी चलाकर आई थी। रवीना को अंदर बुलाया। और रवीना को आज एक अलग ही स्पेशियल रूप में देख कर रोहित बस यहीं बश सका, " आज तो तुम बहुत सुंदर लग रही हो"
रवीना ने कहाँ, " तुम बुद्धु ही रहोगे" कहते हुए ही रोहित का हाथ पकड़ लिया। रोहित को डर लगा पर रवीना ने आगे कहाँ, " देखो रोहित!! मुझे तुमसे प्यार है, मैं तुम्हारे बगैर नहीं जी सकती हुँ, और मैं तुमसे ही शादी करूँगी किसी और से नहीं।
पर रोहित ने हाथ छुड़ाया और उदास मन से नीचे बैठ गया।
रवीना बोली, "क्या हुआ रोहित"
रोहित ने नजरें नीचे रखते हुए ही कहा, " मैं एक गरीब परिवार से हुँ और तुम अमीर घराने से, यह जमाना हमें एक होने देगा क्या? तुम इस गरीब को युँ झुठे ख्वाब मत दिखाओ।। हाँ!! हम अच्छे दोस्त है और रहेंगे।"
रवीना अब उसके पास ही बैठ गई और बोली कि तुम क्या सोचते हो कि मैं झूठ बोल रही हुँ, अरे!! सच्ची में तुमसे प्यार करती हुँ और तुम मुझे समझ ही नहीं रहे हो।

रोहित बोला, " मैं तुम्हें समझ रहा हुँ, पर तुम शायद जमाने की हकीकतों से अनजान हो, और तुम्हारे पापा मान जायेंगे क्या?"
"मैं मनाऊँगी उन्हें!! तुम उनकी चिंता करे।। मैं उनकी लाडली बिटिया हुँ।। और रोहित मैं तुम्हारे बिना नहीं जी सकती। प्लीज!!" रवीना लगभग रो पड़ी।
रोहित बोल पड़ा," अरे पागल प्यार तो मुझे भी है तुमसे और बहुत ज्यादा मगर इसी डर की वजह से आज तक कहा नहीं मैनें।"
रवीना ने चेहरे पर मुस्कान बिखेरते हुए कहा कि सच्ची?
"हाँ!! और तुम्हारी आवाज ने तो जादु करके रखा है मेरे दिल पर बस डर की वजह से कभी कहाँ नहीं। और मैं अब तुम्हारे प्यार के साथ तुम्हारे और ज्यादा मेहनत करूँगा ताकि  अच्छी जॉब मिल सकें।"
रवीना ने रोहित के सर पे एक किस किया और कहा कि चलो आज बाहर चलते है कहीं। रेस्टोरेंट पर।
रोहित बोला, "अरे!! कहीं नहीं!! आज तुम पहली बार कमरे पे आई हो!! यहीं चाय पीते है और चाय मैं बनाऊँगा।"
रवीना हँस पड़ी और बोली, "जी हुजुर"
और फिर दोनों ने चाय पी ।।
अब रवीना बोली कि मुझे चलना चाहिये काफी देर हो चुकी है घरवाले भी चिंता करेंगे।
और कार से रवाना हो गई। रोहित एकटक उस ओर देखता ही रहा!! पता नहीं कब तक खड़ा रहा।। फिर फोन की घंटी बजी तो अंदर आकर देखा कि रवीना का ही कॉल है, अटेंड करते ही आवाज आई ,"घर पहुँच गई हुँ, बाद में मिलते है"!
और फोन कट गया..... और रोहित भी वापस पढ़ने बैठ गया, जैसे आज ही सब कुछ सीख जायेगा। अब तो जुनुन सवार हो गया था उस पर.........
प्रथम वर्ष में रोहित ने क्लास टॉप की और रवीना का भी पाँचवा स्थान था।। और आगे की क्लास में भी दोनों के बीच प्यार मोहब्बत की बातें चलती रही... वक्त को जैसे पंख लग गये थे!!
B.com फाइनल इयर में नवंबर महीने में रवीना के लिये एक रिश्ता आया, लड़के के पिता का खुद का बिजनेस था और बहुत ईज्जतदार घराना था, लड़का भी सुंदर था। रवीना के पापा ने रवीना से पूछा तो उसने मना कर दिया और पहली बार पापा को बताया कि उसे रोहित से प्यार है और उसी से शादी करना चाहती है।
यह सुनते ही उसके पापा को गुस्सा आया और उस दिन से रवीना का कॉलेज छूट गया!! फोन, गाड़ी सब कुछ छीन लिया गया!! बस एक कैदी की तरह घर में ही समय बिताना था।
इधर रोहित को जब रवीना कई दिन नजर न आई और न कॉल आया तो परेशान हो गया और कॉल किया तो भी फोन बंद बताया। रोहित बहुत चिंतित हो गया पर कर भी क्या सकता था, रवीना की सहेलियों से भी पूछा मगर सब यहीं बोली कि कहीं नजर नहीं आई। अब परेशान रोहित ने कॉलेज जाना भी छोड़ दिया और न उसका मन पढ़ाई में लगता। बस कमरे पे पुरे दिन उदास उदास सा सोया रहता।
फिर जनवरी में फोन पर एक अनजान नंबर से मैसेज आया।
"सॉरी रोहित!! मैं मजबूर हुँ, इतनी मजबूर कि तुमसे एक बार मिल भी नहीं सकती! और मार्च में मेरी शादी है। हो सकें तो माफ कर देना!! और मैसेज का रिप्लाई मत करना क्योंकि यह बड़े भाई के नंबर है!!"
रोहित के पाँवों तलें कि जमीन खिसक गई हो जैसे!! वो बिस्तर में ही मुँह छुपाकर रोने लगा। लगभग पुरे दिन रोता रहा।। फिर जानें कब नींद आ गई, भूखे पेट ही.......
सुबह जब दूधवाले ने आवाज लगाई तो नींद खुली!!!
अनमने मन से चाय पी पर आँखें लाल होने से अब भी उसे नींद सी महसूस हो रही थी और मन में जानें क्या ऊथल पुथल था।। फिर भी कोशिश करके नहाकर कॉलेज की तरफ रवाना हुआ बिना कॉपी पेन किताब के। बस वहाँ जाकर केंटिन में एक चेयर पर बैठकर न जानें क्या सोचता रहा फिर ऊठकर वापस कमरे पर।। और अब उसके हाथ में किताब थी।। पढ़ने में मन नहीं लग रहा था मगर शायद कुछ संकल्प करके बैठा था बस लगातार किताब को ही घूर रहा था.....
और इसी बीच वक्त गुजरता रहा और फाइनल इयर की परीक्षा आ गई... रोहित ने बहुत कोशिश की पर पेपर बिगड़ गये।। और रिजल्ट में पिछड़ गया।। फिर भी नहीं घबराया!! आगे पढ़ाई जारी रखी।।
और दो साल बाद ही मुंबई की एक प्रसिद्ध कंपनी में जॉब लग गई।।.......
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और दस साल बाद वो उस कंपनी का वाइस मैनेजर था। और कंपनी के मैनेजर ( स्वयं मालिक ) के कोई संतान न थी काफी उम्र का था वो तो कंपनी का सारा लेनदेन और कामकाज रोहित के जिम्मे था।......
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और पुरानी यादों में खोयें रोहित की आँखें नम हो गई थी। टीवी ऑफ किया ही था कि अचानक से मोबाइल की घंटी बजी, कोई अनजान नंबर थे। बैमन से कॉल अटेंड किया तो ऊधर से एक सुरीली आवाज आई, "हैलो!! इज दिस रोहित"....
और आवाज सुनते ही रोहित की आवाज ही रूक गई, हृदय की धड़कन सी गई, वो सुन्न हो गया।
फिर से आवाज आई फोन पर , "क्या आप रोहित बोल रहे है"?
रोहित की तंद्रा टुटी तो कहा जी हाँ!! रोहित बोल रहा हुँ।। और तु!!! तु! तुम!! तुम रवीना हो ना!!?
"अरे!!! तुम मेरी आवाज पहचानते हो अब भी!!" ऊधर से आवाज आई।
"हाँ!! तुम्हारी आवाज कैसे भूल सकता हुँ मैं, रोज ही तो तुम्हारी आवाज में गानें सुनता हुँ। पर तुम्हें नंबर कहाँ से मिलें।"
"नंबर तो!!! परसों एक मीटिंग थी ना!! तुम भी थे वहाँ!! उस मीटिंग में,. मैं अपने हजबेंड के साथ आई थी गेस्ट रूम में थी मैं, जब तुम्हारी आवाज सुनी तो जानी पहचानी आवाज लगी इसलिये बाहर से ही देखा कि तुम बोल रहे हो!! मैं तुम्हारे मैन्जमेंट फंडे की कायल हो गई।। कितने बढ़िया सुत्र बता रहे थे, फिर घर जाकर मीटिंग की फाइल देखी तो तुम्हारा नाम और और नंबर मिलें।"
"ओहो!!! वो तो छोड़ो।। सुनाओ कैसी हो?"
"ठीक है!! तुम सुनाओ!! और यह क्या है!! तुमने शादी नहीं की अब तक!! तुम्हारी फेसबुक प्रॉफाइल देख रही हुँ।। सिर्फ शायरी, गीत, कवितायें।। शायर बन रहे हो शायद।"
"ह ह ह ह!! अरे!! शादी करके भी क्या करना है।"रोहित ने ठहाका लगाया।
पर ऊधर रवीना शायद बहुत सीरियस हो गई और बोली, "तुमने मुझे माफ नहीं किया शायद"
रोहित ने हँसी कंट्रॉल करते हुए कहा," माफ!! अरे तुम्हारी क्या गलती है जो माफी चाहिये। तुम मस्त रहा करो।। टेंशन नहीं लेना।"
पर रवीना को यह जवाब अच्छा नहीं लगा, वो बिल्कुल रोते हुए कहने लगी, " प्लीज रोहित!! मान जाओ। मुझे समझ आ रहा है तुमने मेरी वजह से ही शादी नहीं की है, पर मैं मजबूर थी..."
रोहित ने बात बीच में काटते हुए कहा कि नहीं!! नहीं रवीना!! मैं तुमसे नाराज नहीं हुँ ।। पर मैं शादी नहीं करूँगा? तुम मजबूर हो जो तुम्हें शादी करनी पड़ी, पर मैं नहीं। बस निकल जायेगी युहीं जिंदगी।
रवीना बोली, " ओके रोहित!! आज करवा चौथ है। मैं शाम को व्रत खोलते समय तुम्हारी भी लंबी उम्र की दुआ करूँगी!! ओके फोन रखती हुँ पतिदेव आ गये है।"
फोन कटने पर रोहित कुछ देर खड़ा जानें क्या सोचता रहा फिर गाड़ी लेकर निकल पड़ा।
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दुसरे दिन अखबार में खबर छपी जिसकी हैडलाइन ली-- कार एक्सीडेंट में प्रसिद्ध कंपनी के वाइस चैयरमेन की मौत।
©® जाँगीड़ करन kk
20/10/2016

18 टिप्‍पणियां:

  1. उत्तर
    1. मुझसे सुखद अंत बन नहीं रहा था।

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  2. सरल शुरुआत ,मध्य में रोचक ☺ बढ़िया लेखन

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  3. बहुत सुंदर
    शायरो को शायद अपना प्रतिविम्ब दिखाई दे

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  4. महोब्बत अमीरी गरीबी नही देखती चाहे जिस हम महोब्बत करे वो हमे मिले या ना मिल
    पर जज्बातों का रिश्ता हमेशा रहता है

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    1. हाँ....
      मगर कुछ हालात ऐसे होते है जो मजबूर कर देते है, और यहीं जमाने का दस्तूर है।

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    2. हा माना की हालात हमे मजबूर कर देते है अलग होने के लिये लेकिन अपने दिल में उनके मायने तो वही रहते हे ना जो पहले थे

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    3. मायने रखते हुए ही तो रोहित ने उस समय तक शादी तक नहीं की। ना कभी रवीना से मिलने की।
      फिर जब रवीना ने आगे होकर उसे कॉल किया और लंबी उम्र की दुआ की तो यह उससे सहन नहीं हुआ।।
      और परिणाम सामने है ।।।

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  5. उत्तर
    1. ह ह ह ह।।
      अरे!!!!!
      मुंशी प्रेंमचंद।।।
      बस बस

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  6. उत्तर
    1. जय हो।।।
      आपको अच्छी लगी।।
      बस मजा आ गया

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  7. बहुत खुब ..... लेकिन अंत दुखद ....

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    1. शुक्रिया दादा।।
      अंत यहीं बन रहा था।।

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A letter to swar by music 35

Dear swar, ...................... रंगों से भरी है दुनिया रंग ही जीवन रंग ही खुशी रंग से चलती है सौगातें रंग हर जुबां की भाषा ...........