Friday, 21 April 2017

Alone boy 19

कि
सूरज
को देखो,
क्षितिज से उठकर
अपनी यात्रा पे
निकला है,
शायद किसी
साथ की
तलाश उसे भी है,
देखो तो
उसे
इस नीले
आसमान में
वो तन्हा ही
निकल पड़ा है,
हां,
उसे
मालूम भी है कि
उसे
अपना काम तो
करना ही है,
हां,
निगाहें अब भी
उसकी
क्षितिज की
ओर है,
कि
कब मिलन होगा,
और फिर जानती हो ना,
शाम हो जानी है,
ऐसे ही
मैं
सूरज की तरह
अनवरत
हुं,
जिंदगी की राह में,
तेरी तलाश में,
पर
डर
अब भी
है कि
मिलन से पहले
कहीं
जिंदगी की
शाम न हो जायें।
©® जाँगीड़ करन kk
21_04_2017__8:00AM

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