Monday, 17 April 2017

हिंदी की रसधार

तुम इंग्लिश की कड़वाहट हो,
मैं हिंदी की रसधार प्रिये।

तुम यम की दूत बनी बैठी,
मैं जीवन का आधार प्रिये​।

तुम शहर का फास्ट-फूड हो,
मैं शुद्ध देशी आहार प्रिये।

लड़ाई झगड़े की तुम नानी हो,
मैं हरदम करता करार प्रिये।

जहां जहां मैं खाई देखुंं,
भरता वहां मैं दरार प्रिये।

बस तेरी कमी ही रह गई है,
बिन तेरे मन भी है बेकरार प्रिये।

छोड़ो सारे भरम अब तो,
कभी कर लो तुम भी इकरार प्रिये।

Photo from Google due thanks

©® जाँगीड़ करन kk
17_04_2017___15:00PM

No comments:

Post a Comment

प्रकृति और ईश्वर

 प्रकृति की गोद में ईश्वर कहें या ईश्वर की गोद में प्रकृति ......  जी हां, आज मैं आपको एक ऐसे प्राकृतिक स्थल के बारे में बताऊंगा जहां जाकर आ...