रविवार, 15 मई 2016

जीवनचक्र 2030

घटनाक्रम -- 15 मई, 2030

"हैलो डार्लिंग!!! ऊठो भी अब" लगभग चादर खींचते हुए मैं बोला
"गुड मॉर्निंग अंकल!! आप भी ना!!!! अब तो छुट्टियाँ है शांति से सोने दीजिये।" नितेश ने आँखें मलते हुए कहा।
"आज कितनी तारीख है? तुम्हें मालुम है ना!"
"हाँ!! 15 मई!! पर इससे क्या?"
अरे!! तुम भूल गये? ऊठो!! अपना मुँह धोओ! सब याद आ जायेगा"
"ओहो! मुझे सब याद है अंकल! आज चिड़िया आंटी का बर्थडे है। और मुझे क्या करना है यह भी पता है।"
"अहा!! लव यु डार्लिंग! तो रेडी हो जाओ! मैं नाश्ता तैयार करता हुँ।"
"ओके अंकल!"
(नितेश बाथरूम में घुस जाता है , और मैं किचन में)
(थोड़ी देर बाद नाश्ते की टेबल पर)
"अंकल!! एक बात बताओ!"
"हाँ!! पुछो ना!"
" आपको मैं पिछले दस साल से देख रहा हुँ चिड़िया आंटी का बर्थ डे मनाते हुए पर आज तक चिड़िया आंटी नहीं आई कभी और न कभी आप मुझे मिलवाने ले जाते हो"
"बेटा!! एक दिन वो आयेगी"
"यह तो दस साल से सुन रहा हुँ, मगर अब तक नहीं आई!! और अब किस लिये आयेगी?"
"एक गिफ्ट का कुछ हिस्सा मेरे पास पड़ा है उसे जरूरत पड़ेगी उसकी!! वो लेने जरूर आयेगी"
"कौनसा गिफ्ट?"
"वो छोड़ो! तुम्हें याद है ना क्या क्या करना है?"
"हाँ! अभी जंगल जाकर सारे पशु पक्षियों को आमंत्रित करना है। फिर बर्थ डे की विशेष तैयारी भी... मैं जाता हुँ"
..............
(दोपहर लगभग बारह बजे नितेश तैयारी में बिजी है, मैं गाँव में कुछ काम से गया हुआ था, तभी दरवाजे पर घंटी बजती है, नितेश दरवाजा खोलता है, सामने कोई 35 साल की सभ्य महिला खड़ी थी)
"आप?? आप कौन?
" क्या यह करन जी का घर है?"
"जी!!! आप अंदर आइये!!"
(अंदर टी टेबल पर)
"आपके घर का नाम बड़ा प्यारा है- चिड़िया घर"
"हाँ!! वो मेरे करन अंकल ने रखा है"
"करन अंकल? मगर वो दिख नहीं रहे हैं?"
"वो गाँव में कुछ काम से गये है"
"ओहो!! ओके।। और आज घर में बड़ी अच्छी सजावट है कुछ खास है क्या?"
"हाँ!! आज तो चिड़िया आंटी का बर्थडे है"
"(घोर आश्चर्य से) क्या? चिड़िया आंटी? कौन है ये?"
"मैं भी नहीं जानता, अंकल जानें"
"(एक कमरे की तरफ इशारा करते हुए) क्या यह करन जी का कमरा है?"
"हाँ!!! मगर आपको कैसे पता"
"नहीं बस युहीं अंदाज लगाया"
(कमरे के पास जाकर)
"वाह!! क्या लिखा है हैप्पी बर्थ डे स्वर"
"वो भी अंकल ने ही लिखा है"
"मैं यह कमरा खोल सकती हुँ क्या?"
"ह ह ह! मुझे इतने साल हो गये है, पर आजतक इस कमरे में नहीं जा सका, क्योंकि दरवाजे पर पासवर्ड वाला ताला लगा है"
"तो!!"
"तो क्या!! पासवर्ड सिर्फ अंकल जानते है"
"मैं कोशिश करूँ?"
"हाँ!!! क्यों नहीं!! मैं तो थक गया हुँ सालों से कोशिश की है पर नहीं खुला"
(वो महिला ताले के चक्कर को इधर ऊधर घुमाती है और कुछ ही पल में क्लच की आवाज के साथ ही ताला खुल जाता है)
"(नितेश आँखें फाड़कर देखते हुए) आप कौन है?
" मैं!!! मैं चिड़िया हुँ बेटा"
"चीं चीं चीं!! चिड़िया आंटी!! आप!!"
"हाँ!! चिड़िया आंटी!! अब अंदर चलें!"
"नहीं!! मैं नहीं आऊँगा अंदर! अंकल ने मना कर रखा है, आप ही जाओ"
"ओह! ओके!!!"
(कमरा!! कमरा क्या अजायबघर!! चारों तरफ पेंटिंग्स चिड़िया की, बहुत सी डायरियाँ,  सामने टेबल पर एक काँच का छोटा बर्तन था जिसमें घड़ी की चैन के टूटे हुए कुछ हिस्से, एक बर्तन में कागज के कुछ टुकड़े जिन पर कुछ लिखा था, स्टडी टेबल पर एक फ्रेम थी जिसमें करन जी और नितेश का फोटो लगा था, पर जैसे ही फ्रेम उठाई तो फोटो चेंज, चिड़िया आ गई अब, कल की डायरी का पेज पढ़ा तो लिखा था कल चिड़िया का बर्थ डे मनाना है).....
(तभी दरवाजे पर घंटी बजती है और चिड़िया फटाफट कमरा बंद कर बाहर आ कर टी टेबल पर बैठ जाती है)
(नितेश दरवाजा खोलते हुए) अंकल!!! आप आ गये?
"हाँ!! मगर बाहर वो कार किसकी खड़ी है?"
"कार!!! वो किसकी है यह खुद आप देख लीजिये, सामने देखिये"
( और जब दोनों कि आँखें मिलती हैं तो दोनों को एक दुसरे के पहचानने में एक पल का भी वक्त नहीं लगता है, पर न जानें क्यों! दोनों एक दुसरे को एकटक देखते है, कुछ मिनिट तक)
"(नितेश चुटकी बजाते हुए) हैलो!!! अंकल! मैं भी हुँ यहाँ?"
"(झेंपते हुए) ओह!! तो मतलब नीतु!! तु इनसे बात कर चुका है? मतलब कि जानता है कि ये कौन है?
" हाँ!! और बहुत कुछ और भी जान गया"
"क्या?"
"कुछ नहीं!! बस युहीं। आप दोनों यहाँ बैठिये, मैं आपके लिये चाय बनाकर लाता हुँ।"
(और बिना जवाब की प्रतीक्षा किये वो तुरंत किचन में भाग गया, जबकि उसे चाय बनानी नहीं आती, शायद दरवाजे पर खड़ा होकर हमारी जासुसी कर रहा होगा)
(फिर टी टेबल पर)
"और सुनाइये मास्टर जी।"
"मास्टर जी!!! बहुत सालों बाद यह शब्द सुना है, तुम्हें अब भी याद है, मैं ठीक हुँ, तुम सुनाओ"
"आप ना!! बिल्कुल भी नहीं बदलें! पागल ही हो !! वैसे मैं भी ठीक हुँ"
और हाँ शादी क्यों नहीं की?"
"ह ह ह ह!! शादी!! किस्मत में नहीं थी"
"मुझे मत बनाओ, मुझे सब पता है"
"क्या सब पता है!! छोड़ो ये बैकार की बातें।। एक बात तो है तुम आज भी वैसी ही दिखती हो, हाँ, मोटी जरूर हो गई हो!"
"रियली?" तुम तो पागल हो?
"ह ह ह, वो तो मैं हुँ। कोई शक।
"कोई शक नहीं!!"
"और आपके पतिदेव? वो कैसे है?"
"वो तो उनके हाल में मस्त है, उन्हें मेरी या मेरी बच्ची की परवाह नहीं है"
"बच्ची? कहाँ है? साथ लायी?"
"नहीं! लाती तो वो अपने पापा से शाम को बोल देती कि मम्मी दिन में कहाँ गई थी"
"ओफ्फ!! पर लाना चाहिये था! वैसे तुम्हारी तरह क्यूट होगी गुड़िया भी"
"ह ह ह ह, हाँ क्यूट!! पता है किरन नाम रखा है मैनें, उसकी एक आदत आपसे मिलती है ढेर सारे सवाल, बिल्कुल आपकी तरह के, दिन में कई बार पुछती है मम्मी कैसे हो?
खाना खाया? वो अभी छ: साल की ही है पर बिल्कुल आपकी तरह केयर करती है मेरी"
"ओह!! क्या बात है! मुझे किरन से मिलना है।"
"मौका मिला तो मिलवा दुँगी! बस वहीं इक आस है जो जीने पर मजबूर करती है"
"क्यों? क्या हुआ?"
" कुछ नहीं पर!! सबकुछ सुना सुना सा लगता है, और किसी को कहने से रही, मैनें खुद अपनी दुनियाँ इस तरह बसाई है कि खुद पर अफसोस होता है"
"ऐसी बात नहीं है! सब अच्छा ही होगा"
"क्या अच्छा होगा? आप कहते थे ना आदमी जैसा दिखता है जरूरी नहीं अंदर से वैसा हो, अब समझ आता है, पर अब बहुत देर हो चुकी है, और मैनें जो अपराध किया है उसके लिये भी तो खुद को माफ नहीं कर पा रही हुँ"
"अपराध?"
"हाँ अपराध!! आप आज जिस तकलीफ को जानबुझकर सीने पे पत्थर रखकर सहन कर रहे हो, उसकी जिम्मेदार मैं हुँ"
"अरे नहीं यार!! ऐसा कुछ नहीं है, यह मेरी मानसिकता थी, और मैं दुखी कहाँ हुँ, मैं एकदम खुश हुँ देखो!"
"हाँ!! वो दिख रहा है, बड़े नाटकबाज हो, जोकर कहीं के, सबकुछ छुपाकर मुस्कुराना, यह आपसे बेहतर कोई नहीं कर सकता"
"अरे मैं रियली खुश हुँ"
"आप मुझे मेरा वो करन लौटा दो, जिसने कभी जिद्द करी थी कि चिड़िया तुम्हें आना है, वहाँ पर, वो करन चाहिये जो कहें तुम्हारे लिये देखो गजरा लाया हुँ, वो करन चाहिये जो दस बार पुछे कि अबे नौटंकी!! खाना खाया कि नहीं..... बस करन बहुत सहन कर चुकी हुँ, अब नहीं होता, प्लीज मुझे मेरे वो दिन लौटा दो!"
"चिड़िया!! देखो। वो समय अलग था, यह समय अलग है, तुम्हारी खुद की जिम्मेदारियाँ है, मेरी भी?"
"तो तुम भी बदल रहे हो? तुम्हीं कहा करते थे कि करन बदला नहीं करते, बस चुप रह जाते है"
"वो बात नहीं चिड़िया, मैं अगर बदलता तो कब की शादी कर चुका होता, मेरा प्यार सिर्फ नीतु और तुम्हारे लिये है, यह तुम अच्छी तरह से जानती हो, मगर...
" क्या मगर? जमाना? तुम भी डरने लगे?"
"डर? डर नहीं है!! बस जिम्मेदारियाँ! वक्त के साथ सबकुछ अलग तरह से करना पड़ता है"
"हाँ!! पता है!! लेकिन जानते हो, मैं हर रोज आपके ब्लॉग से रचनाएँ पढ़ती हुँ, वो कशिश आज भी उसी तरह बरकरार है, फिर मुझसे क्यों छुपाते हो?"
"तुम भी ना!! देखो रूलाओगी क्या? और हाँ ज्यादा सेंटी मत हो, वो नीतु आसपास छुपकर सब सुन रहा होगा, वो बच्चा नहीं, बाद में चिड़ायेगा मुझे?"
और हाँ ये तुम्हारे बाल भी पक गये है, मुझसे ज्यादा? तुम कहती थी ना कि आपके सर पे इतने जल्दी सफेद बाल आ गये? मेरे तो बहुत कम है सफेद पर तुम्हारे तो?
"हाँ!! तुम्हारी याद में शायद।?"
"अरे नहीं!! तुम मस्त रहा करो! मेरी चिंता न करो, जानती हो ना, मैं कर्ण हुँ हारकर भी अमर होना जानता हुँ।?
" यह हार नहीं जीत है आपकी, हारी तो मैं हुँ।"
"ना, ना, ना!! तुम जीती हो, तुमने वो कर दिया जो तुमने सोचा, मगर मैं नहीं कर सका"
"जो आपने चाहा वो ही तो किया ना आपने, वैसे आप कितने अच्छे हो"
"ह ह ह ह। यह लाइन रहने दो अब! शुरू में सुनी थी तुम्हारे मुँह से अच्छी लगती थी, लेकिन अब?"
"अब क्या हुआ!! अच्छे हो अब भी!!"
"ओफ्फो!! यह बातें छोड़़ो, और बाकी क्या चल रहा है?"
"कुछ नहीं, दिन काट रही हुँ, अच्छा अब चलती हुँ, घरवाले इंतजार कर रहे होंगे"
"अरे!! रुको!! तुम्हारा बर्थडे है। तुम यहाँ हो तो केक काट कर जाओ"
"ओह!! आप!!! तुम कितने अच्छे हो करन"
"अबे पागल!! अब रुलायेगी क्या?" नीतु बाबा!!!! वो केक लाओ तो!"
"(किचन से) अभी लाया अंकल"
(और फिर हैप्पी बर्थडे चिड़िया की आवाज घर में गुँजने लगी, एक दुसरे को केक खिलाया)
"करन, एक कल्पना है कि आप ऐसे ही खिलाते रहो मुझे!"
"ओहो!! जब खाने का मन हो चली आना"
"(बीच में ही) अंकल!!! क्या चल रहा है?"
"नहीं तो!! कुछ नहीं!! तुम यह बाकी का केक छत पर चिड़ियों के लिये डाल आओ"
(बाकी केक हर बार की तरह छत पर चिड़ियों को डालने के लिये नीतु ले गया)
"(चिड़िया ऊठते हुए)तो!! अब मैं चलुँ?"
"हाँ!!!! चलना तो है ही! तुम शुरू से ही बहुत जल्दी में रही हो! पर वो घड़ी अब तुम्हारे हाथ में बहुत टाइट आ रही होगी, बाकी की कड़ियाँ ले जाओ, पड़ी है कमरे में, लगवा देना!
" वो तो मैनें देख ली है, कमरे में, और हाँ घड़ी वास्तव में टाइट लगती है अब!!"
"कैसे देखी?"
"लॉक खोल कर!! पासवर्ड तो वहीं है ना"
"ओहो!!!. तो जाओ लेकर आओ!"
(कमरा!! कमरे में दोनों।। बस यादें। कुछ और सवाल जवाब, आखिर जिंदगी सवालों में ही तो ऊलझी है)
"सॉरी करन जी!! मेरी सब गलतियों की वजह से.....
" श्श्श्श !!!!! बस अब नहीं!! तुम जाओ!! मैं बहुत खुश हुँ यहाँ! हाँ कोई प्रॉब्लम हो तो बता देना!"
"बा। बा। बा। बाय। टेक केयर"
"बाय बाय!! आराम से जाना"
।।।।।
(और फिर घर में कुछ मिनटों तक सन्नाटा, और सन्नाटें को तोड़ती आवाज सीढ़ियों से आई)
"अंकल!! क्या चिड़िया आंटी हमेशा के लिये यहाँ नहीं रह सकती?"
"नहीं बेटा!! वो मजबूर है"
"ओह अंकल!! आप कितने अच्छे है।"
( और दोनों सिर टकराकर रो पड़ते है)
©® जाँगीड़ करन KK.

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