बुधवार, 24 फ़रवरी 2016

बोझिल राहें

बोझिल सी राहें
गुमसुम सी निगाहें,
संभलकर भी
संभल नहीं पा रहा हुँ मैं।

दिल है बेकरार,
सुनता नहीं प्यार,
समझकर भी
समझ नहीं पा रहा हुँ मैं।

कहाँ है ऊलझन,
जिंदगी बनी जोगन,
जी कर भी
जी नहीं पा रहा हुँ मैं।

समझता नहीं कोई,
फिर भी आँख रोई,
भूलकर भी उन्हें
भूल नहीं पा रहा हुँ मैं।

आवाज है सुन्न,
तन्हा है मन,
सुनकर भी 'स्वर'
सुन नहीं पा रहा हुँ मैं।

बदलता है जहाँ,
ठहरता है कहाँ,
'करन' तो हुँ मगर
कर्ण नहीं हो पा रहा हुँ मैं।

©® जाँगीड़ करन kk
24/02/2016....... 18:30 pm

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें

दिल्ली वाली गर्लफ्रेंड

#आया_दिल्ली_वाली_गर्लफ्रेंड_छोड़_छाड़_के.... हां! तकरीबन चार साल पहले यह गाना सुनने में बहुत अच्छा लगता था, और इसका विडियो तब से आज तक है म...