गुरुवार, 29 जून 2017

दिल की पीर

ओझल होती नजरों से मोहब्बत का आकार दिखा दूं।
कभी आओ जो महफ़िल में लफ्जों से मैं चांद दिखा दूं।

कहां खेलता है आसमान बादलों की पारी को,
तुम तो मेरे करीब रहो बारिश का अहसास दिला दूं।

धरती पहन के चूनर धानी देखो कितना इठलाती है,
तुम जो रहो संग मेरे मैं इसकी चूनर लहरा दूं।

बेशक सारा जहां जलेगा तुम्हें यहां पर देखकर,
मैं तो तुझ में खोया रहकर प्रेम की नई रीत बता दूं।

आंखें अब भी तकती रहती राहें तेरे आने की,
दिल की पीर कौन सुनें किसको अपना हाल सुना दूं।
©® करन

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A letter to swar by music 35

Dear swar, ...................... रंगों से भरी है दुनिया रंग ही जीवन रंग ही खुशी रंग से चलती है सौगातें रंग हर जुबां की भाषा ...........