Tuesday, 7 July 2015

जिद-एक कोशिश

पत्थरों पर फूल उगाने चला हुँ आज,
यह सुरज भी मुझे जलाने चला है आज!
बादलों की आस है ही नही मेरे दिल में,
मैं 'स्वर' जुनुन का ले निकल पड़ा हुँ आज!!
©®karan dc

No comments:

Post a Comment

A letter to swar by music 49

Dear swar, गणित तुम्हारी आदत है, मगर मुझे तो यूं लगता है कि तुम्हें गिनती भी नहीं आती होगी, हैरान होने की बात नहीं है!! तुम्हें कैलेंडर...