मंगलवार, 14 फ़रवरी 2017

A letter to swar by music 21

Dear SWAR,
Happy valentine's day....
"ये महकते फूल है, ये महकती वादियां,
किसी हँसी चेहरे ने आवाज दी हमको"
............
हां, तुम्हें मालुम होगा ही कि बसंत ऋतु है अभी। सबकुछ यहां महका महका है, आँगन की मिट्टी भी महकती है, रसोई से आ रही पकवानों की खुशबू से यह घर भी महकता है, तुम्हारी याद से मेरे मन का कौना कौना महकता है...
और सुनो!!
तुमने मेरी डायरी को छुआ था आज भी उस डायरी का पन्ना पन्ना महकता है, तुम्हारे अहसास से जीवन का हर क्षण महकता है, तुम्हारे नाम लिखे होने से ग़ज़ल भी महकती है...
और सुनो.....
यह जो बसंत का मौसम है, यह हर एक मन के ख्यालात बदल देता है, सबके मन में इक तरंग सी उठती है, बस प्रेमी प्रेमिका एक दुसरे से मिलने को आतुर रहते हैं, और सब के सब इन महकती वादियों में कहीं खो जाना चाहते हैं, और यह अच्छा भी है....
.......................
  "कितने दिन की जिंदगानी है,
           कैसे इसे बितानी है।
    मोहब्बत की बस राह मिलें,
          तो सफल सारी कहानी है।।"
..........................
मगर,
सुनो पार्टनर,
जिंदगी का अपना एक अजीब फलसफा है, यह कब क्या दिखाती है किसी को मालूम नहीं, इस फलसफे में उलझे हम न जानें कहां चलें जाते हैं,
तुम उधर न जानें किस रास्ते पर हो और इधर न जाने में किस राह पर हुँ, बस इस दुनिया की भागदौड़ में दोनों चल रहे है, हां!!!! तुम अपनी मंजिल की ओर हो, और निरंतर चल रहे हो, निश्चित ही मंजिल तक पहुंच जाओगे, यहीं हमारी दुआ भी है.…...
मगर इधर मैं अपनी मंजिल से भटका न जानें किस राह पर हुँ, अब कोई मंजिल नजर नहीं आती.... हर तरफ बस रास्ते ही रास्ते ही रास्ते हैं..... मैं समझ नहीं पा रहा कि किस रास्ते पर जाऊं..... बस इन चौराहों पर इधर उधर भटकता हुँ कि शायद कोई इशारा मिल जाए.... बस तुम्हारे इशारे की फिराक में हुँ, मुझे विश्वास है कि एक दिन तुम जरूर आओगी, जब मैं ठोकर खाकर गिरने को होउँगा तब मुझे सहारा देने जरूर आओगी.....
"दूर कितना चलना है,
क्यों हम यह चिंता करें.....
बस तेरी जुल्फों
की छांव हो,
जिंदगी फिर किस
रफ्तार चलें....
बैकल मंजिल,
उदास है उपवन,
खुशबू भरे पदचिह्न
क्यों आज इधर न पड़े....
ख्वाबों का संसार
परिंदों की पहचान,
मगर परों में उलझे,
रिश्तों के धागे पड़े........
अलमस्त फकीरा
करन कहलायें,
स्वर का गायन लेकर निकला,
भटकने से अब कौन डरे.......
.........
और अंत में तुम्हारा शुक्रिया जो तुम मेरी valentine बनी, हां....
मैंने कहा ना मेरी मोहब्बत का अंदाज बस कुछ निराला है........
न जग समझेगा,
न शायद तुम भी,
हम प्रेम की बिन नैया वाली
खिवैया में चलते है.....
.........
With love
Your only
Music

©® जाँगिड़ करन kk
14_02_2017____6:00 AM

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