शुक्रवार, 17 मार्च 2017

चाँद से

चाँद की रौनक फीकी लगती है ना,
तुम्हारे  माथे बिंदिया जँचती है ना।

छम छम कोई आवाज सुनाई है तुमने,
मेरे कानों को सरस तो लगती है ना।

चेहरे  की  रंगत कुछ  बदली सी है,
हमें देखकर लजा सी लगती है ना।

अपनी जुल्फों को युँ बाँधा न करो,
ये आजाद ही अच्छी लगती है ना।

क्या तुमने गुनगुनाया है गीत मेरा,
तेरे स्वर में ग़ज़ल प्यारी लगती है ना।

देखो तुम्हें देखकर मुस्कुरा रहा करन,
यह मुस्कान तुम्हें अच्छी लगती है ना।
©® जाँगीड़ करन kk
17_03_2017___19:00PM

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A letter to swar by music 35

Dear swar, ...................... रंगों से भरी है दुनिया रंग ही जीवन रंग ही खुशी रंग से चलती है सौगातें रंग हर जुबां की भाषा ...........