Thursday, 16 March 2017

Alone boy 10

कल रात
वो
छत पर बैठकर
आसमां में
कुछ घूरता रहा,
और अचानक नजर
ठिठक गई,
हां,
तीन तारे
एक साथ नजर
आयें थे उसे,
एक लाइन में,
बिल्कुल करीब करीब,
दोनों तरफ के
तारों के साथ
कोई थे,
पर बीच
का तारा
अकेला ही था,
कुछ उदास सा,
कुछ हैरान सा,
.....
मगर उसकी नजर
दूर
उसी दिशा में
एक तारे
पर थी
और वो तारा भी
क्या तारा था,
चमकीला,
सौम्य,
सबसे आकर्षक,
उसने तारे को
करीब बुलाया
मगर
वो नखरीला तारा,
कब उसकी सुनता,
लेकिन इस
तन्हा तारे को
भरोसा है
एक समय तो
आयेगा
ऐसा कि
वो चमकीला तारा
उसके करीब जरुर आयेगा,
..
पर डर इस
बात का
भी है कि
कहीं तारे के
आने से पहले
भौर
न हो जायें
जो
दोनों की
जिंदगी को
लील
जायेगी,
हां, वो उदास है
इसलिए भी।
©® जाँगीड़ करन kk
16_03_2017___06:00AM

No comments:

Post a Comment

A letter to swar by music 52

Dear swar, कई रोज़ हुए मुझे तुम्हारा कोई ख़त नहीं मिला। पहले तो मैं हर सुबह दरवाज़े की आहट पर चौंक जाता था, जैसे डाकिए के हाथों में तुम्हारे...